देवतिलक!
देवतिलक A commentator of ‘Kalyanamandir Stotra’ (a treatise). कल्याणमंदिर स्त्रोत के टीकाकार।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवतिलक A commentator of ‘Kalyanamandir Stotra’ (a treatise). कल्याणमंदिर स्त्रोत के टीकाकार।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पदक्षिणा वर्त- बाई ओर से दांई ओर घूमना, श्रद्धापूर्ण अभिवादन जो इस प्रका प्रदक्षिण द्वारा किया जाये। pradaksina varta – taking round of circumambulation.
दूरापकृष्टि A type of Krishti (gradual destruction of passions). कर्मों का स्थितिकाण्डकघात होते-होते जब सबसे जघन्य पल्योपम के संख्यातवें भाग प्रमाण स्थिति शेष रह जाती है वह स्थिति दूरापकृष्टि है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमोद- मुख की प्रसन्नता आदि के द्वारा भीतर की भक्ति और अनुराग का व्यक्तहोना। यतियों के गुधें का विखर करके उनके गुधें में हर्श मानना यह प्रमोद भावना का लक्षण है। Pramoda- Joy, pleasure, delight
तपोवृद्ध Saints more experienced or senior in austerities. तप करने में जो बडे अर्थात् अनुभवी है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दृष्टिप्रवाद A part of scriptural knowledge (Shrutgyan). द्वादशांग श्रुत का 12 वाँ अंग जिसमें 363 मिथ्यात्व मतों का निराकरण है, यह दृष्टिवाद का अपरनाम है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक बोधित- देखें- प्रत्येक बुद्ध। pratyeka bodhita – see (pratyeka buddha)
दृढ़चर्याक्रिया To have strict faith in own philosophy. दीक्षान्वय की 48 क्रियाओं में एक शास्त्र के अर्थ का अवधारण करके स्वमत में दृढ़ता धारण करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाणनिर्माण- नामकर्म की प्रकृति; जिसके उदय से शरीर के अंगों की रचना यथास्थान तथा यथाप्रमाण हो। PramanaNirmana- A type of physique making Karma causing properly proportionate body