विहायोगति (नामकर्म)!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहायोगति (नामकर्म) –Vihayogati (Namakarma). A type of karmic nature causing spatial move-ment. नामकर्म की एक प्रकृति, जिसके उदय से जीव का आकाश में शुभ व अशुभ गमन हो “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहायोगति (नामकर्म) –Vihayogati (Namakarma). A type of karmic nature causing spatial move-ment. नामकर्म की एक प्रकृति, जिसके उदय से जीव का आकाश में शुभ व अशुभ गमन हो “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्यकाल–Mukhyakaal. A type of prime period of time. वर्तना लक्षण काल का प्रथम भेद; गौण काल की प्रवृत्तिइसी काल के कारण होती है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंग विचय – Bhamga Vicaya. A type of disquisition door. एक अनुयोगद्वार; जो मार्गणाओं के विच्छेद और विच्छेद के अस्तित्त्व प्ररुपक है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा आगत:Authenticity of scriptures, approved by spiritual leaders (Acharyas). आगम की प्रमाणिकता जो आचार्य परम्परा से आगत होने के कारण जानी जाती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय दोष – Bhaya Dosa. A fault; paying reverence with fear. व्युत्सर्ग का एक अतिचार; सत्यभय आदि से युक्त होकर वन्दनादि करना “
दण्डकारणिक An administrator who can punish, A magistrate. दण्ड देने वाला अधिकारी । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुद्धि ऋद्धि – Buddhi Riddhi Supernatural power of intellect. एक प्रकार की ऋद्धि जिसके १८ भेद हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्म:Verse, Four months stay of saints at a particular place during rainy season. काव्य, साधु का एक स्थितिकल्प वर्षाकाल के चार मास पर्यंत एक स्थान पर ही रहना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुध्द्ववीर्य – Buddhavirya. Name of the questioner of Lord Pushpadant. तीर्थकर पुष्पदंत के समवसरण में मुख्य प्रशनकर्ता “