मृत्यु!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृत्यु–Mratyu. Death. मरण; जीवो के प्राणों का विसर्जन या जीव का निष्प्राण हो जाना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृत्यु–Mratyu. Death. मरण; जीवो के प्राणों का विसर्जन या जीव का निष्प्राण हो जाना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल बंध – Pudgala Bamdha. Assemblage of two or more matters. दो, तीन आदि पुद्गलों का समवाय संबंध. स्कंध; स्निग्ध- रुक्ष आदि गुणों के कारण पुद्गलों का जो बंध होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – प्रकाशक भाव – Prakasya- Prakashka Bhava. Relation of illuminating objects & means of illu-mination. कार्य – कारण संबंध; प्रकाश्य पदार्थ है और, प्रदीप, सूर्य, चन्द्र आदि प्रकाशक हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामा – Vaamaa.: Mother’s name of Lord Parshvanath. भगवान पार्श्वनाथ की माता “अपरनाम ब्राम्ही ,वर्मिला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यफल – Punyaphala. The fruit of meritorious actions. पुण्यकार्यों से प्राप्त होने वाला शुभ फल. अर्हन्त अवस्था को पुण्य का उत्कृष्ट फल जानना चाहिए “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भामंडल – Bhamamdala. Name of Seeta’s brother, An auspicious em-blem of Lord Arihant. सीता का भाई, अष्ट प्रातिहायों में एक प्रातिहार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वादीभसिंह (अजितसेन )- Vaadibhasingha (Ajitasena).: Name of the disciple of Vadiraj-2. वादिराज-2 के शिष्य ,यादवराज ऐरेयंग शांतराज तेलगु (ई.-1103 ) के गुरु “स्याद्वाद सिद्धि के रचयिता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंडितमरण –Panditamaran. A type of holy death of saints occurring from the 6th stage of spiritual development (Gunsthan) upto the 11th one. समाधिपूर्वक मरण; छाते गुणस्थान स्वे लेकर ग्यारहवें गुणस्थान तक में होने वाला मरण पंडित मरण है” भक्त प्रत्याख्यान, डंगिनी और प्रायोपगमन ये तीन मरण पंडित मरण है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेय–Meya. Measurable substances. मेय, देश, तुला, कालचतुर्विधमानो में एक भेद; प्रस्थ आदि के द्वारा मापने योग्य वस्तु मेय कहलाती है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय विनय – Bhaya Vinaya. Reverence due to fear. भय के कारण विनय करना “