सर्वज्ञदेव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वज्ञदेव – Sarvagyadeva. Omniscience (Lord Arihant, Siddha). केवली आप्; जो त्रिकालवर्ती गुण पर्यायो से संयुक्त समस्त लोक और अलोक को प्रत्यक्ष जानते है वह सर्वज्ञदेव है अर्थात् अर्हत व सिद्व।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वज्ञदेव – Sarvagyadeva. Omniscience (Lord Arihant, Siddha). केवली आप्; जो त्रिकालवर्ती गुण पर्यायो से संयुक्त समस्त लोक और अलोक को प्रत्यक्ष जानते है वह सर्वज्ञदेव है अर्थात् अर्हत व सिद्व।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग सम्यग्दर्शन –VitaragaSamyagdarsana. Right faith without any attachment. निश्चय सम्यग्दर्शन, वीतराग चारित्र के साथ अविनाभावी, जिस सम्यकत्व भाव में आत्मा की विशुध्दी, तन्मयता हो ” यह सातवें से दसवें गुणस्थान तक होता है “
चूर्णिका Pounded rice or grain. भेद का एक प्रकार ; उड़द मूंग आदि का जो खंड किया जाता ह.ई , वह चूर्णिका है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सरीसृप – Sareesripa. A reptile, crawing beings. पानी मे रहने वाला एक प्रकार का सर्पः एक तिर्यच जीव। इसकी उत्कृष आयु 9 पूर्वाग की है एवं जघन्य आयु अन्तर्मुहूर्त की है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाटक समयसार – Nataka Samayasara A book written by pandit banarsidas. पं. बनारसीदास द्वारा समयसार पर रचित एक ग्रंथ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा वर्गणा – Bhasha Vargana. See – Bhasha Dravya Vargana. देखें – भाषा द्रव्य वर्गणा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सयोगकेवली – Sayogakevalee. An omniscient possessing physical presence. सशरीरी परमात्मा। 13 वें गुणस्थान मे अरहंत परमात्मा जो अनंत चतुष्टय सहित परमौदारिक देह सहित है, जिनका उपदेष व विहार होता है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तिपथ–Muktipath. Path of salvation. परिग्रह का त्याग मुक्तिमार्ग है”