परंपरा आगम!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा आगम:Scriptures as stated by Gandhar (Chief disciple of Lord) etc. गणधरादि द्वारा कथिम आगम ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा आगम:Scriptures as stated by Gandhar (Chief disciple of Lord) etc. गणधरादि द्वारा कथिम आगम ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थाधिगम – Svaarthaadhigama. Self knowledgeable approach. अधिगम के दो भेदो मे एक भेद, यह ज्ञान स्वरुप है जो प्रमाण और नय भेदो वाला है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पनसा:A river of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरत क्षेत्र स्थित आर्यखण्ड की एक नदी ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सद्भाव : == किं तेणावि घडिज्जइ जो न हु सब्भावरसनिसित्तो वि। पुरिसो य पुहइिंपगे व मिज्जिओ अप्पमप्पेइ। —गाहारयणकोष : ६५ जो सद्भाव के रस से अभिसिंचित नहीं है, उसके जन्म से क्या लाभ ? पुरुष तो पृथ्वी के िंपड जैसा होता है जो पानी से भीजकर अपने आपको…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाद्य – Svadya. Worth tasting, appetizing. आहार के 4 भेदो मे एक भेद। मुख का स्वाद बदलने के लिए खाने वाले लौग, इलायची आदि पदार्थ स्वाद्य कहलाते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंगविधि – Bhamgavidhi. A particular method for obtaining knowledge of something, synonym word for shrutgvan (scrip- tural knowledge). अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शील आदि भंग का जिसके द्वारा विधान किया जाता है उसे भंगविधि अर्थात् श्रुतज्ञान कहते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शौच : == समसंतोसजलेणं जो धोवदि तिव्व—लोहमल—पुंजं। भोयण—गिद्धि—विहीणो, तस्स सउच्चं हवे विमलं।। —समणसुत्त : १०० समता और संतोष के जल से जो तीव्र लोभ के मल—पुंज को धाया करता है, भोजन की लालसा से जो विहीन हुआ करता है, वह पवित्र शौच धर्म से संपन्न होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांसारिक दुःख – Saansaarika Duhkha. Worldly affictions or troubles. लौकिक विषयों से उत्पन्न दुःख अर्थात् भोगसाधनात्मक भोगो का वियोग होने से जो दुःख उत्पन्न होता है। संसारी जीवों का इन्द्रिय सुख वासना जनित होने के कारण होने के कारण दुःखमय ही है क्योंकि आपत्त्किाल मे भोग व रोग चित्त मे उद्वेग करने वाले है।