पंच अग्नि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अग्नि – Pancha Agni. Five kinds of fire, Five fold conducts observed by jain Acharyas. पांच प्रकार की अग्नि ” जैसे जैन धर्मके अनुसार पंचाचार को पंचाग्नितप भी कहते है ” जिनका पालन प्रमुखता से आचार्यगण करते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अग्नि – Pancha Agni. Five kinds of fire, Five fold conducts observed by jain Acharyas. पांच प्रकार की अग्नि ” जैसे जैन धर्मके अनुसार पंचाचार को पंचाग्नितप भी कहते है ” जिनका पालन प्रमुखता से आचार्यगण करते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्ररूचि – Sutra Ruchi. Right perception generated through the scripture listening. सूत्रसम्यग्दर्शन, मुनि के चारित्रानुष्ठान को सूचित करने वाले आचार सूत्र को सुनकर जो तत्वार्थश्रद्धान होता है, उसे सूत्र रूचि सम्यग्दर्शन कहा जाता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – Prakashya. Liable to be revealed. प्रगट करने योग्य “
उत्कृष्ट आयु Highest age time. देव व नारकी उत्कृष्ट आयु 33 सागर है तथा मनुष्य तिर्यंचों की 3 पल्य है। कर्मभूमि में एक करोड़ पूर्व वर्ष है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीरमातंडी –Viramatamdi Name of a Kannad commentary book written by Chamundarai. चामुंडराय (ई. श. १० – ११) द्वारा रचित गोमट्टसार की कन्नड़ वृत्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिशाच देव – Pisaca Deva. A type of peripatetic deities. व्यंतर देवों के दस भेदों में से एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म बादर स्कन्ध – Sukshma Baadar Skandha. Invisible existing matters like air, words etc स्कन्धों के 6 भेदों में से एक भेद । जो स्कन्द दिखाई न दे परन्तु उनका कार्य प्रगट हो जेसे हवा, शब्द आदि ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मित्र : == सोसउ मा सोसउ च्चिय सलिलं रयणायरस्स बडवऽग्गी। जं लहइ जले जलणो तेण च्चिय किं न पज्जत्तं।। —गाहारयण कोष : ४० हे बडवाग्नि ! तू समुद्र के जल को सोख या न सोख, पानी में तुझे जो आग मिलती है अर्थात् दुश्मन के घर में अपना…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुस्वरा – Susvaraa. Name of a female deity of a peripatetic Indra Gitaras. गीतरस व्यंतर इन्द्र की देवी ।