04. गाथाओं में पाठ भेद
गाथाओं में पाठ भेद समयसार ग्रंथ में कहीं-कहीं गाथा में पाठ भेद-अन्तर होने से टीकाकार आचार्यों ने दोनों पाठ रखकर दोनों के अर्थ कर दिए हैं। किसी एक पाठ को प्रमाण और दूसरे को अप्रमाण नहीं माना है। उदाहरण में देखिए— (१) वंदित्तु सव्वसिद्धे धुवमचलमणोवमं गइं पत्ते।वोच्छामि समयपाहुडमिणमो सुयकेवलीभणियं।।१।। समयसार, पूर्वार्ध, पृ. ८ से १४।…