भूकम्प एक प्राकृतिक आपदा है, इसे रोका जा सकता है ( सन् २००० में लिखित आलेख ) लेखिका—प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती माताजी २८ अप्रैल १९९९ की रात्रि में आए भूकम्प ने जहाँ जनमानस में दहशत की स्थिति उत्पन्न कर दी है, वहीं मानवता के प्रति कुछ सोचने को भी विवश कर दिया है। इस धरती पर…
मूल जैन संस्कृति : अपरिग्रह अपरिग्रह से तात्पर्य है—मात्र ‘‘स्व’’ और ऐसे ‘स्व’ से जिसमें पर—परिग्रह का विकल्प ही न हो। अरहन्त—तीर्थंकर अपरिग्रही—पूर्ण दिगम्बर हैं ‘स्व’ में विराजमान और ‘स्व’ में विराजमान और ‘स्व’ रूप में स्थित भी। ज्ञान रूप आत्मा के सिवाय उनका स्व—तत्त्व अन्य कुछ नहीं—वे ज्ञाता दृष्टा कहलाते हैं सो भी परकीय…
बाल विज्ञान ज्योति लेखिका – पूज्य आर्यिका श्री अभयमती माताजी यह बाल विज्ञान ज्योति नामक लघु पुस्तक बच्चों के लिए बहुत कार्यकारी है, इसमें पूज्य माताजी ने प्रश्न-उत्तर के माध्यम से अनेक जटिल विषयों को सरलता से प्रस्तुत किया है। जिन विषयों को लोग अच्छी तरह से नहीं भी जानते हैं, उन्हें इन प्रश्न-उत्तरों के…
जिन पूजा एवं गंधोदक आचार्य विद्यानन्द मुनि सारांश जैन समाज में पूजा पद्धति के बारे में वर्तमान समय में चल रही निरर्थक भ्रांतियों के बारे में आगमोक्त स्पष्टीकरण एवं मार्गदर्शन प्रस्तुत आलेख में प्रदान किया गया है। सम्पादक – पैरों पर चंदनादि के टीके लगाते हैं तो आप उसका निषेध क्यों करते हो ? शब्द…
काकन्दी तीर्थ ६. तीर्थंकर पुष्पदंत जन्मभूमि जैनधर्म के नवमें तीर्थंकर ‘‘श्री पुष्पदन्तनाथ’’ के जन्म से पवित्र काकन्दी नगरी वर्तमान में ‘‘खुखुन्दू’’ नाम से भी प्रसिद्ध है। पूर्वी उत्तरप्रदेश में गोरखपुर के निकट देवरिया जिले में ‘‘खुखुन्दू’’ नाम का एक कस्बा है। जैन परम्परा में अत्यन्त प्राचीन काल से ‘‘काकन्दी’’ का नाम बड़ी श्रद्धा से लिया…
कषाय प्राभृत का प्रारंभिक परिचय कषाय प्राभृत ग्रंथ का भगवान महावीर की द्वादशांगवाणी से साक्षात् संबंध है। अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रधान गणधर श्री गौतमस्वामी ने उनकी दिव्यध्वनि को अवधारण करके द्वादशांग श्रुत की रचना की थी। उसके बारहवें अंग का नाम दृष्टिवाद था। यह अंग बहुत विस्तृत था। उसके पाँच भेद थे—परिकर्म, सूत्र,…
श्री पार्श्वनाथ दि.जैन कमठाण अतिशय क्षेत्र —ब्र. कु. इन्दू जैन (संघस्थ) जला बीदर (कर्नाटक) में स्थित कमठाण नामका यह अतिशय क्षेत्र बीदर बस स्टैण्ड से आधा कि.मी.दूर एवं रेलवे स्टेशन से ११ कि.मी. दूर है। रेल अथवा सड़क मार्ग, मुम्बई-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.९ से १९ कि.मी. की दूरी पर है। बीदर जैन मंदिर में भी…
मंगल आशीर्वाद -उपाध्याय श्री गुप्तिसागर जी महाराज आज ये जैन समाज बहुत सौभाग्यशाली है कि गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी इस समाज के लिए एक ऐसा प्रकाश स्तंभ है, जिसके आलोक ने बहुत सारी आत्माओं को प्रकाशित होने का मौका दिया है। एक तरफ आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परम्परा के पट्टाचार्य श्री वर्धमानसागर…