03. णमोकार महामंत्र अनादि है, इसके अनेक प्रमाण हैं।
जिनागम नवनीत णमोकार महामंत्र अनादि है, इसके अनेक प्रमाण हैं। श्रीमान् उमास्वामी आचार्य ने कहा है— ये केचनापि सुषमाद्यरका अनन्ता, उत्सर्पिणी-प्रभृतय: प्रययुर्विवत्र्ता:। तेष्वप्ययं परतरं प्रथितं पुरापि, लब्ध्वैनमेव हि गता: शिवमत्र लोका:।।३।। श्लोकार्थ —उत्सर्पिणी, अवसर्पिणी आदि के जो सुषमा, दु:षमा आदि अनन्तयुग पहले व्यतीत हो चुके हैं, उनमें भी यह णमोकार मंत्र सबसे…