‘‘हमारे सरताज दश धर्म’’ यह पर्व जीवन में नया परिवर्तन लाता है। दश दिवसीय यह पावन पर्व पापों और कषायों को रग रग से विसर्जन करने का संदेश देता है। क्षमा धर्म—क्रोध अग्नि के समान है तो क्षमा जल के समान है, क्षमा का नीर क्रोध की अग्नि में लगातर पड़ता रहे तो क्रोध…
भरत चक्रवती द्वारा बनवाए गए जिनमंदिरों का राजा दशरथ ने जीर्णोद्धार कराया है। ये भरताद्यैर्नृपतिभिरुद्धाः कारितपूर्वा जिनवरवासाः। भङ्गमुपेतान् क्वचिदपि रम्यान् सोऽनयदेतानभिनवभावान्।।१७९।। इन्द्रनुतानां स्वयमपि रम्यान् तीर्थकराणां परमनिवासान्। रत्नसमूहैः स्फूरदुरुमासः संततपूजामघटयदेषः।।१८०।। भरतादि राजाओं ने जो पहले जिनेन्द्र भगवान् के उत्तम मन्दिर बनवाये थे वे यदि कहीं भग्नावस्था को प्राप्त हुए थे तो उन रमणीय मन्दिरों को…
श्री देबारी पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र —ब्र. कु. सारिका जैन (संघस्थ) श्री देबारी पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र राजस्थान के उदयपुर जिले में अवस्थित है। ग्राम देबारी स्थित इस तीर्थ पर मात्र एक ही जिनमंदिर है। यह स्थान उदयपुर रेलवे स्टेशन तथा बस स्टैण्ड से मात्र १० कि.मी. की दूरी पर है। उदयपुर से…
श्रीरामचन्द्र जी ने लंका में स्वर्णमयी हजार खंभों वाले पद्मप्रभ मंदिर के दर्शन किये इस प्रकार सुन्दरी स्त्रियों के मुख—कमलों को विकसित करते हुए वे सब विभीषण के राजभवन में पहुँचे।।६०।। उस समय राम, लक्ष्मण आदि की शुभ—लक्षणों से युक्त जो विभूति थी वह देवों के लिए भी आश्चर्य उत्पन्न करने वाली थी।।६१।। अथानन्तर हाथी…
श्री नाइचाकुर पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र -फूलचंद चन्द्रकांत जैन (अध्यक्ष-नाइचाकर अतिशय क्षेत्र) सोलापुर से ९० कि.मी. दूर, बस स्टैण्ड उमरगा से २० कि.मी. एवं नारंगवाड़ी से ७ कि.मी. दूर स्थित यह अतिशय क्षेत्र मराठवाड़ा संभाग में है। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में स्थित यह क्षेत्र ५०० वर्ष पुराना है। यहाँ भगवान पार्श्वनाथ की अतिशय…
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, पिड़रुवा —ब्र. कु. इन्दू जैन (संघस्थ) श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पिड़रुवा मध्यप्रदेश के सागर जिले में पिड़रुवा ग्राम में स्थित है, तहसील बंडा है। रेलवे स्टेशन सागर से ३५ कि.मी. दूर है, बस स्टैण्ड से भी इसकी दूरी ३५ कि.मी. है। सड़क मार्ग पाली से पिड़रुवा या…
समयसार के टीकाकार श्री जयसेनस्वामी के अनुसार पहले,दूसरे,तीसरे तीन गुणस्थान में तरतमता से अशुभोपयोग है ,पुनःचौथे ,पाचवें,छठे इन तीन गुनस्थानों में तरतमता से शुभोपयोग है |इसके अनंतर सातवें से लेकर बारहवें इन छ: गुनस्थानों में तरतमता से शुध्दोपयोग हैं,पुनःतेरहवें,चौदहवें गुनस्थान में शुध्दोपयोग का फल हैं|
इसी तथ्य को छहढालाकार ने परीपुष्ट किया हैंअत: वर्तमान में चौथे गुनस्थानमें स्वरूपाचरण चारित्र को घटना किसी भी प्रकार उचित नहीं हैं|
सम्मेदशिखर व्रत विधि सम्मेदशिखर सिद्धक्षेत्र शाश्वत तीर्थ है। यहाँ से हमेशा चतुर्थकाल में तीर्थंकर भगवान एवं असंख्यातों मुनिगण मोक्ष प्राप्त करते रहे हैं और आगे भी मोक्ष प्राप्त करते रहेंगे। इस सिद्धक्षेत्र के २५ व्रत हैं। इस बार चतुर्थकाल में हुण्डावसर्पिणी के निमित्त से सम्मेदशिखर पर्वत से २० तीर्थंकर ही मोक्ष गये हैं, शेष चार…
श्री १००८ सहस्रफणी अतिशय क्षेत्र (बीजापुर) बीजापुर अतिशय क्षेत्र कर्नाटक प्रांत के बीजापुर जिले में अवस्थित है। यह क्षेत्र बीजापुर रेलवे स्टेशन से ६ कि.मी. दूर तथा बस स्टैण्ड से २ कि.मी. दूर है। रेल अथवा सड़क मार्ग से व्हाया सोलापुर होकर जा सकते हैं। यहाँ भगवान पार्श्वनाथ की सातिशय प्रतिमा लगभग १५०० वर्ष प्राचीन…