संस्कृति सरंक्षण, सामाजिक विकास एवं पांडुलिपियाँ!
संस्कृति सरंक्षण, सामाजिक विकास एवं पांडुलिपियाँ प्रस्तावना हमारे प्राचीन आचार्यों ने मोक्ष मार्ग के लिये छ: बाह्य (अनशन, अवमोदार्य, वृत्ति परिसंख्यान, रस परित्याग, विविक्त शय्यासन, काय क्लेश तथा छ: अन्तरंग (प्रायश्चित, विनय, स्वाध्याय, वैयावृत्ति, व्युत्सर्ग, ध्यान) तपों का मार्ग बताया है।१ इनमें स्वाध्याय को भी एक अन्तरंग तप माना है। स्वाध्याय तप के अन्तर्गत वाचना,…