बेहतर स्वास्थ्य के लिए पैदल चलिए १.पैदल घूमने से मानसिक एवं शारीरिक तनाव भी समाप्त होता है । २. घूमने से मासपेसियों में रक्त प्रवाह सुचारु रूप से चलने के कारण हृदय तथा फैफड़ों से सम्बन्धित रोगों से बचा जा सकता है। ३. सुबह सैर के चलने से पहले पानी पी कर चलना…
माताजी का प्रथम शिष्या से वियोग (ज्ञानमती माताजी की आत्मकथा) अजमेर से विहार-अजमेर में चातुर्मास के बाद कालू के श्रावक आचार्य संघ का विहार कराने के लिए प्रार्थना करने आ चुके थे। आचार्यश्री ने स्वीकृति भी दे दी थी अतः संंघ अजमेर से विहार करके पीसांगन नाम के एक छोटे से गाँव में कुछ दिनों…
महाभारत का संक्षिप्त परिचय राजा शान्तनु के पुत्र – पाराशर, पाराशर की स्त्रियां – गंगा और गुणवती गंगा से गांगेय पुत्र (भीष्म पितामह) गुणवती से – व्यास, पुत्र, व्यास के तीन पुत्र-धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर। धृतराष्ट्र की गांधारी पत्नी से – दुर्योधन, दु:शासन आदि सौ कौरव पुत्र | पाँडु के कुन्ती पत्नी…
चौंतीस अतिशय एवं आठ प्रातिहार्य (तिलोयपण्णत्ति ग्रंथ से) चउरंगुलंतराले उवरिं सिंहासणाणि अरहंता। चेट्ठंति गयणमग्गे लोयालोयप्पयासमत्तंडातिलोयपण्णत्ति-चतुर्थ महाधिकार पृ. २६२ से २६५ तक।।। ८९५।। णिस्सेदत्तं णिम्मलगत्तत्तं दुद्धधवलरुहिरत्तं। आदिमसंहडणत्तं समचउरस्संगसंठाणं।।८९६।। अणुवमरूवत्तं णवचंपयवरसुरहिगंधधारित्तं। अट्ठुत्तरवरलक्खणसहस्सधरणं अणंतबलविरियं।। ८९७।। मिदहिदमधुरालाओ साभावियअदिसयं च दसभेदं। एदं तित्थयराणं जम्मग्गहणादिउप्पण्णं।। ८९८।। जोयणसदमज्जादं सुभिक्खदा चउदिसासु णियराणा। णहगमणाणमहिंसा भोयणउवसग्गपरिहीणा।।८९९।। सव्वाहिमुहट्ठियत्तं अच्छायत्तं अपम्हपंदित्तं। विज्जाणं ईसत्तं समणहरोमत्तणं सजीवम्हि।। ९००।। अट्ठरसमहाभासा…
प्राण सुदर्शन – गुरु जी! आज पड़ोस में एक आदमी के मरने से लोगों ने कहा-इसके प्राण निकल गये। सो प्राण क्या है? अध्यापक – हाँ सुनो! जिसके सद्भाव से जीव में जीवितपने का और वियोग होने पर मरणपने का व्यवहार है, उनको प्राण कहते हैं। प्राण के दस भेद हैं-स्पर्शन आदि पाँच इन्द्रियाँ, मनोबल,…
किचन में न बनाएं पूजा स्थल पं. केवल आनंद जोशी नवभारत टाइम्स ” Jun 26, 2014, जब कोई व्यक्ति घर बनाता है या घर का नवीनीकरण करता है तो चाहता है कि उसका घर वास्तु के अनुसार बने। इसलिए, चार बातों का ध्यान विशेष रूप से रखा जाता है कि घर में पूजा का स्थान…
आचार्य श्री अभिनंदनसागर जी महाराज की संक्षिप्त जीवन गाथा बचपन जन्म- आचार्यश्री अभिनंदनसागर जी महाराज का व्यक्तित्व अत्यन्त सामान्य, उदार, भोला होने के साथ ही चर्या के प्रति दृढ़ता, सिद्धान्तों के प्रति निर्भीकता और धर्म के प्रति अहर्निश समर्पण से भरा-पूरा है। ऐसे आचार्य महाराज का जन्म राजस्थान प्रान्त में उदयपुर जिले के…
पर्याप्ति और प्राण विग्रहगति में एक, दो अथवा तीन समय तक अनाहारक रहने के बाद यह जीव अपने उत्पत्ति स्थान में, जाकर जिन आहारवर्गणा के परमाणुओं को ग्रहण करता है उन्हें खल रस भागादि रूप परिणमाने की उसकी शक्ति क्रम से विकसित होती है । शक्ति विकास की पूर्णता को पर्याप्ति कहते हैं । जिन…
एकावली व्रत किंनाम एकावलीव्रतम्? कथं च विधीयते व्रतिकै:? अस्य किं फलम्? उच्यते-एकावल्यामुपवासा एकान्तरेण चतुरशीति: कार्या:, न तु तिथ्यादिनियम:। इदं स्वर्गापवर्गफलप्रदं भवति। इति निरवधिव्रतानि।। अर्थ- एकावली व्रत क्या है? व्रती व्यक्तियों के द्वारा यह कैसे किया जाता है? इसका फल क्या है? आचार्य कहते हैं कि एकावली व्रत में एकान्तर रूप से उपवास और पारणाएँ की…