श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा विरचित मेरी स्मृतियाँ — एक समीक्षा!
श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा विरचित मेरी स्मृतियाँ — एक समीक्षा पुरुषोत्तम दुबे वैराग्य का अर्थ है, खिंचाव का अभाव। वैराग्य के सम्बन्ध में पतंजली ने कहा है— दृष्टानु श्रविक विषय वितृष्णस्य वशीकारसंज्ञा वैराग्यम (१.१५) दृष्ट और आनुश्रविक विषयों के प्रति वितृष्णा की वशीकार भावना को वैराग्य कहते हैं। इसके चार भेद है या यों कहना…