कुष्ठी श्रीपाल के साथ मैनासुन्दरी का विवाह
५ – मैनासुन्दरी द्वारा भक्तिभाव से कुष्ठी पति की सेवा मैनासुंदरी अपने पति की सेवा में अहर्निश लगी रहती थी। घाव धोकर औषधि लगाती, पट्टी बाँधती और प्रकृति के अनुकूल भोजन कराती थी। वह रंचमात्र भी ग्लानि नहीं करती थी। कभी-कभी अनेक तत्त्व चर्चा और धर्म कथाओें के द्वारा पति का मन अनुरंजित किया करती…