कहाँ जाता है -सर्वाधिक तीव्र गति मन अर्थात् चित्त की होती है ,संसार में फसाहुआ मनुष्य निरंतरमन से न जाने कितने संकल्प-विकल्प किया करता है ,एवं उस जन्य ही पुण्य एवं पाप कर्मों का उपार्जन किया करता है |
आगम ग्रन्थों का स्वाध्याय ही इस मन की स्व्च्छन्द गति को रोकने का एक मात्र उपाय हैं |
जिन-श्रुत-गुरु-सिद्ध-रत्नत्रयस्नपनविधि(पं.आशाधरसूरिविरचित)
‘जम्बूद्वीप ज्ञानपीठ’ पर ब्र. भाई जी का आरोहण पूज्य १०५ क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज (मुनि श्री मोतीसागर जी के रूप में सल्लेखना प्राप्त) के पश्चात् ‘जम्बूद्वीप ज्ञानपीठ’ का कार्यभार आदरणीय ब्रह्मचारी रवीन्द्रकुमार भाई जी के सबल कंधों को सौंपा गया है। वह चारित्रचन्द्रिका परमपूज्य गणिनी आर्यिकारत्न श्री ज्ञानमती जी द्वारा उठाया गया स्वागत योग्य…
शुभकामना संदेश धर्मनिष्ठ, कर्मनिष्ठ, गुरुभक्तपरायण, असीम शक्ति के धनी, अद्भुत कार्यक्षमता से युक्त, जम्बूद्वीप धर्मपीठ के पीठाधीश स्वामी रवीन्द्रकीर्ति जी महाराज ने अपनी पूर्व अवस्था में भी ब्र. रवीन्द्र कुमार जी के रूप में भारत में नहीं अपितु विश्व में धर्मध्वजा फहरायी है। पीठाधीश क्षुल्लकरत्न श्री मोतीसागर जी महाराज के १० नवम्बर को समाधिमरण के…