वीरस्या भूषणं क्षमा!
क्षमा वीरस्य भूषणं —प्रो. डॉ. विमला जैन ‘विमल’, फिरोजाबाद उत्तम क्षमा की अमिथ धार से, क्रोध ताप मिट जाता है, तब क्रोध विभाव विलीन हुआ, शुद्धात्म कमल खिल जाता है। इस कोप कषाय की अग्नि से, द्वीपायन मुनि तप तेज गया, द्वारिका संग जन—धन नाशे, इहलोक और परलोक गया। संयम—तप क्षमा की ज्योति है, ज्योतिर्मय…