आवृत्तकरण!
आवृत्तकरण Obscuration (related to Karmic theory). अन्य प्रकृति रूप करके कर्म का नाश करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आवृत्तकरण Obscuration (related to Karmic theory). अन्य प्रकृति रूप करके कर्म का नाश करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपविष्टोपविष्ट A type of meditative relaxation (with thoughts of pain, trouble & cruelty etc.). कायोत्सर्ग का एक भेद बैठे हुए आर्त्त रौद्र ध्यानों का चिन्तवन करना। अपरनाम उपविष्ट निविष्ट।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय अनशन – Nishchaya Anasana. Absolute fasting with conquering the worldly desires. मुनि अवस्था में विषय सुख की अपेक्षा न करते हुए अर्थात् मन व इंद्रियों को जीतते हुए आत्मसुख में ही निवास करना”
उपरितन कृष्टि A type of krishti (gradual destruction of passions). चरम द्विचरम आदि कृष्टियों को उपरितन कृष्टि कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शलाका पुरुष – Shalaakaa Purush. Particular 63 great personages like Tirthankar (Jaina-Lord), Chakarvarti (emperor) etc. in Jaina realm. तीर्थंकर, चक्रवर्ती आदि प्रसिद्द पुरुषों को शलाका पुरुष कहते है ” प्रत्येक कल्पकाल में ये 63 होते हैं ” 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 नारायण, 9 प्रतिनारायण, 9 बलभद्र “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मर्षि – Brahmarsi. Saints having supernatural knowledge (pertain- ing to wisdom and medicines), Another name of Laukantik deities. बुद्धि और औषधि ऋध्दियुक्त साधु ब्रह्मर्षि कहलाते हैं , लौकांतिक देवों को भी ब्रह्मर्षि कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ दोष –Lobha Dosh A fault related to saint –food talking (showing greed by the saints). यदि साधु लोग प्रगट करके आहार प्राप्त करे तो यह लोभ नाम का दोष है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मदत्त – Brahmadatta. Name of the 12th Chakravarti. १२ वें चक्रवतीं का नाम, जो मरकर ७ वें नरक गये “
उपपादयोग स्थान The place of soul before incarnation . योगों का स्थान अर्थात् आत्मा के प्रदेशों का सकंप जो नवीन शरीर धारण करने के पहले समय में होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]