उपादान कारण(क्षणिक)!
उपादान कारण(क्षणिक) Affluent cause (momentary). क्षणिक रूप से उपादान कारण होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपादान कारण(क्षणिक) Affluent cause (momentary). क्षणिक रूप से उपादान कारण होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिसुव्रत पुराण–Munisuvrat Puran. Name of a treatise written by Brahamchari Krishnadas. ब्र.कृष्णदास (ई. 1624) कृत 3025 श्लोक प्रमाण संस्कृत काव्य”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोहाचार्य –Lohaacharya.: Name of a great Acharya in the era of Lord Mahaveera . महावीर भगवान के निर्वाण के 565 वर्ष बाद हुए आचारान्गधारी चार आचार्यों में चौथे आचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निवृत्ति – Nivrtti. Devoid of all desires, Datachment from worldly life, Abstinence. समस्त अभिलाषाओं कस त्यग करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृगशिरा–Mragshira. Name of a lunar. एक नक्षत्र; इसका अधिपति देवता सोम एवं आकार हिरण के सिर सामान है” भगवान्संभवनाथ का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ प्रत्याख्यान –Lobha Pratyaakhyaana. Renunciation of greed . सत्यव्रत की रक्षार्थ एक भावना ;लोभ के त्याग की भावना “
फालि द्रवय A part of Karmic aggregates. समुदाय रूप कर्म निषेकों का खण्ड। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकालोक विभाग – Lokaaloka Vibhaag.: The universal & non –universal spaces. आकाश द्रव्य के लोक और आलोक का विभाग अर्थात् लोकाकाश और अलोकाकाश “
उपसंपदा Submission . साधुओं के औधिक समाचार का एक भेद गुरूओं को आत्म समर्पण कर आज्ञानुसार आचरण करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रयंग नमस्कार A type of bowing, in which both hands are folded with joining them and head is bowed. नमस्कार का एक भेद दोनों हाथ और सिर से नमस्कार करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]