आपवादिक लिंग!
आपवादिक लिंग White clothed Digambar Jain ascetics etc. परिग्रह सहित भेष या चिन्ह, आर्यिका (उपचार महाव्रती) ऐकल क्षुल्लक आदि जैनधर्म में दो मार्गं हैं- उत्सर्ग मार्ग और अपवाद मार्ग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आपवादिक लिंग White clothed Digambar Jain ascetics etc. परिग्रह सहित भेष या चिन्ह, आर्यिका (उपचार महाव्रती) ऐकल क्षुल्लक आदि जैनधर्म में दो मार्गं हैं- उत्सर्ग मार्ग और अपवाद मार्ग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपराहेतु: Traditional worshipping.प्रत्यक्ष हेतु एका एक भेद शिष्य-प्रशिष्य आदि के द्वारा निरन्तर की जाने वाली अनेक प्रकार की पूजा आदि साधन ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तपस्वी : == नाऽपि तुण्डितेन श्रमण:, न ओंकारेण ब्राह्मण:। न मुनिररण्यवासेन, कुशचीरेण न तापस:।। —समणसुत्त : ३४१ केवल सिर मुंडाने से कोई श्रमण नहीं होता, ओम् का जप करने से कोई ब्राह्मण नहीं होता, अरण्य में रहने से कोई मुनि नहीं होता, कुश—चीवर धारण करने से कोई तपस्वी…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्रोध : == पासम्मि बहिणिमायं, सिसुं पि हणेइ कोहंधो। —वसुनन्दि श्रावकाचार : ६७ क्रोध में अंधा हुआ मनुष्य पास में खड़ी माँ, बहिन और बच्चे को भी मारने लग जाता है। कोवेण रक्खसो वा, णराण भीमो णरो हवदि। —भगवती आराधना : १३६१ क्रुद्ध मनुष्य राक्षस की तरह भयंकर…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मसिंह: A saint who wrote the bgook Gyansara. ध्यानविषयक ज्ञानसार ग्रन्थ के रचयिता एक मुनि (ई0 1029)।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्ष–Yaksha. A type of peripatetic deities, Demigod. व्यंतर देवों के 8 भेदों में एक भेद; समवसरण में एवं अकृत्रिम जिन प्रतिमा को यक्ष देव 64 चमर ढोरते है” 24 वर्तमान तीर्थंकर भगवंतो के 24 शासन यक्ष क्रमक्ष: इस प्रकार है – 1. गोमुख देव 2.महायक्ष देव 3. त्रिमुख देव 4. यक्षेश्वर देव 5….
देवमंत्री Ruling deity of 6th Lunar ‘Pushya’. छठवें नक्षत्र ‘पुष्य’ के अधिपति देवता का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मरागमयी: One of the six circumferences of Sumeru mountain. सुमेरू पर्वत की 6 परिधियों में एक परिधि ।