गुह्यक!
गुह्यक भगवान महावीर का शासन देव (अपरनाम-मातंग यक्ष), देवों की एक जाति; जो देव तीर्थंकरों के कल्यानाकों तथा विहार के समय रत्नवृष्टि औत पुष्पवृष्टि करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुह्यक भगवान महावीर का शासन देव (अपरनाम-मातंग यक्ष), देवों की एक जाति; जो देव तीर्थंकरों के कल्यानाकों तथा विहार के समय रत्नवृष्टि औत पुष्पवृष्टि करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वार्षिक प्रतिक्रमण – Vaarshika Pratikramana.: A type of repentance carried on annually by Jain saints. प्रतिक्रमण के 7 भेदों में एक भेद ,सांवत्सरिक प्रतिक्रमण जो एक वर्ष में किया जाता है “आषाढ़ शु. चतुर्दशी या पूर्णिमा को यह प्रतिक्रमण किया जाता है इसमें गुरु समस्त शिष्यों को एक वर्ष का प्रायशि्चत्त प्रदान करते हैं…
एकपर्यायमययत्व See – Ekapadårthasthitva. देखें- एकपदार्थस्थित्व।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुणित Multiplied. गुणाकार विधि में गुण्य राशि को गुणाकार द्वारा गणित कहा जाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूढ़ता–Muudhta. Ignorance, Stupidity. अज्ञानता, तत्वों के यथार्थ ज्ञान में भड़क कुद्रष्टि” इसकेतीन भेद है – देवमूढ़ता, गुरुमूढ़ता, लोकमूढ़ता”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गच्छ : == रत्नत्रयमेव गण:, गच्छ: गमनस्य मोक्षमार्गस्य। संघो गुणसंघात:, समय: खलु निर्मल: आत्मा।। —समणसुत्त : २६ रत्नत्रय ही ‘गण’ है। मोक्षमार्ग में गमन ही ‘गच्छ’ है। गुण का समूह ही संघ है तथा निर्मल आत्मा ही समय है। अत्यं यासइ अरहा सुत्तं गंथंति गणहरा निउणं। अर्थ (सिद्धान्त/भाव…
गन्धर्वसेन The father of the king Vikramaditya. राजा विक्रमादित्य के पिता ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धद्रव्य नैगम नय – Shuddhadravya Naigama Naya. A standpoint pertaining to pure matters. शुद्धद्रव्य को विषय करने वाले संग्रह व व्यवहार नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुनरुज्जीवन – Punarujjivana. Resurrection, resurgence. पुनर्जीवन “
गणना प्रमाण Mathematical calculation (reg. measurement). लौकिक एवं लोकोतार मान, लौकिक मान ६ प्रकार का एवं लोकोत्तर मान द्रव्य क्षेत्र आदि की अपेक्षा से ४ प्रकार का है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]