बाह्य करण!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य करण – Bahya Karana. External cause causing certainty for the comple-tion of any work. कार्य सिध्द में साधकतम बाह्य निमित जिसके होने पर कार्य की सिध्द निशिचत होती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य करण – Bahya Karana. External cause causing certainty for the comple-tion of any work. कार्य सिध्द में साधकतम बाह्य निमित जिसके होने पर कार्य की सिध्द निशिचत होती है “
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्पन्न स्थान सत्तव Reforming of Karmas by reducing Karmic Sthiti. पूर्व पर्याय में जो उद्वेलना व बिना उद्वेलना से सत्तव हुआ है उसका उत्तर पर्याय में उत्पन्न होना। वहाँ उत्तर पर्याय में उस सत्तव को उत्पन्न स्थान में सत्तव कहा है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरास्रव – Niraasrava. Devoid of attachments, ill-feelings etc. सम्यग्दृष्टि जीव अर्थात् राग, द्वेष और मोह से रहित होना निरास्रव कहलाता है “
चतुर्दश गुणस्थान Fourteen Gunsthan-stages of spiritual developments. १४ गुणस्थान ; मिथ्यात्व , सासादन , मिश्र , अविरत सम्यग्दृष्टि , देशाविरत , प्रमत्त , अप्रमत्त, अपूर्वकरण , अनुवृत्तिकरण, सूक्ष्म-साम्पराय , उपशांत मोह , क्षीणमोह , संयोगकेवली, आयोगकेवली ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकानुवृत्ति –Lokaanuvrtti.: A kind of modesty. सामान्य विनय का एक भेद ;किसी पुरुष के अनुकूल बोलना तथा देश व काल योग्य अपना द्रव्य देना लोकानुवृत्ति विनय है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरतिशय – Niratishaya . Ordinary, without any wonder or transcendent. अतिशय रहित, साधारण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लंका – 1 जम्बुद्वीप के लवण समुद्र के अन्दर स्थित राक्षस द्वीप की नगरी यहां का राजा रावण था। 2 वर्तमान मं लंका नगरी जो भारत के दक्षिण में स्थित है जिसे श्रीलेका के नाम से जाना जाता है। रावण की लंका यह नही है क्योकि यह लवण समुद्र में थी। Lamka-name of a…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकमूढ़ता –Lokmoodhtaa.: False tradition or false ritualistic belief (superstition). लोक में धर्म के नाम से मणि हुई मूढ़ता या अन्धविश्वास “जैसे नदी या समुद्र में स्नान करना , पर्वत करना , बालू –पत्थरों का ढेर लगाना , अग्नि में जलना आदि को धर्म समझकर करना “