मतार्थ!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मतार्थ – Matarth. A method of the exposition of right scriptures (Agam) by refuting the contradictory principles. आगम का अर्थ करने की 5 विधियों में एक विधि ; अन्यमत का निराकरण करते हुए अर्थ निकलना “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मतार्थ – Matarth. A method of the exposition of right scriptures (Agam) by refuting the contradictory principles. आगम का अर्थ करने की 5 विधियों में एक विधि ; अन्यमत का निराकरण करते हुए अर्थ निकलना “
देवकृत अतिशय Fourteen excellences (extraordinary occurrences) of Lord Arihant (done by deities). तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में से 14 अतिशय जो देवों द्वारा किये जाते हैं, जैसे- संख्यात योजनों तक वन असमय में ही पत्र, फूल और फलों की वृद्धि से संयुक्त हो जाते हैं, कंटक और रेती आदि को दूर करती हुई सुखदायक वायु…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मजीरा – Majira. Cymbals; an auspicious article kept near the idol of Lord Jinendra. जिनेन्द्र भगवान के पास सुशोभित दिव्य 108 उपकरणों में एक – झांझ, मंजीरा “
देवता Lord, Deities, Celestial beings. अर्हंत ; सिद्ध आदि भगवान अथवा स्वर्ग में रहने वाले देव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
घोर पराक्रम A type of supernatural power of having omnipotent like power of making dry to the water of an ocean etc. जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु अनुपम तप करते हुए तीन लोक के संघारी की शक्ति से संपन्न और सहसा समुद्र के जल सुखा देने की सामर्थ्य से युक्त होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सभाभवन – Sabhaabhavana. Assembly hall, Auditorium. कक्ष जिसमे सभा आयोजित की जाती है, व्यंतर आदि देवो के चैत्यालयो मे सभा मण्डप।
दिशांजय क्रिया A type of auspicious activity (winning the universe). गृहस्थ की गर्भान्वय आदि 53 क्रियाओं में एक क्रिया- षट् खण्ड सहित समुद्रान्त पृथिवी को जीतकर वहाँ अपनी सत्ता स्थापित करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गोचरी वृत्ति Procedure of food taking of Jaina saints. जैनसाधु की आहारचर्या को गोचरी वृत्ति कहते हैं क्क्योंकी गाय की भाँती वह दतार के प्रति निस्पृह रहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]