श्रुतग्रंथकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतग्रंथकृति – Shrutagranthakriti. The treatises with appropriate meanings. शब्द संदर्भ रूप अक्षरकाव्यों द्वारा प्रतिपाद्य अर्थ को विषय करने वाली जो ग्रंथरचना की जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतग्रंथकृति – Shrutagranthakriti. The treatises with appropriate meanings. शब्द संदर्भ रूप अक्षरकाव्यों द्वारा प्रतिपाद्य अर्थ को विषय करने वाली जो ग्रंथरचना की जाती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य धर्मध्यान – Bahya Dharmadhyana. Religious observances. धर्मध्यान का एक लक्षण; आत्मा को शील , व्रत , उपवास आदि बाह्य क्रियाओं से युक्त करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीवर्द्धन – Shreevardhana. The past-birth soul of omniscient Sanjayant. संजयंत केवली के पूर्वभव का जीव ” यह कुमुदावती नगरी का राजा था “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजदर्शनार्य – Bijadarsanaya. A type of noble persons (Aryas). अनुद्धि प्राप्तार्य में दर्शनार्य का एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रचुरसंख्यक – Prachura Samkhyaka. Abundant in numbers. अधिक संख्या में “
उपाध्याय जिन्हें ग्यारह अंग और चौदह पूर्वों का या उस समय के सभी प्रमुख शास्त्रों का ज्ञान है मुनि संघ में साधुओं को पढ़ाते हें, वे उपाध्याय [[परमेष्ठी]] कहलाते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]] या Preceptor, Scriptural teacher . रत्नत्रय से संयुक्त जिनकथित पदार्थों के शूरवीर उपदेशक और निःकांक्ष भाव सहित ऐसे मुनिराज।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दिगंबर A Jain saint living sacrificial and passionless life with nakedness. दिशारूपी वस्त्र को धारण करने वाले नग्न जैन मुनि अथवा जैनमुनियों की जिनमुद्रा ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिवस पृथ्क्त्व A duration of three to nine days. 3 से 9 दिन के बीच के दिवस। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
इष्ट वियोग Separation from the desired one. इष्ट व प्रिय चेतन-अचेतन पदार्थ का बिछुड जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गंभीर शासन Another name of Jain Shasan. अपर विदेह स्थित एक विभंगा नदी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]