विनय संपन्नता!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनय संपन्नता – Vinaya Sampannata. Reverence with respect (humble reverence). षोडशकारण भावना का एक भेद; ज्ञान आदि गुणों और उनके साधक गुरुजनों का यथायोग्य रीती से आदर सत्कार करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनय संपन्नता – Vinaya Sampannata. Reverence with respect (humble reverence). षोडशकारण भावना का एक भेद; ज्ञान आदि गुणों और उनके साधक गुरुजनों का यथायोग्य रीती से आदर सत्कार करना “
धृतराष्ट्र Father of Duryodhan including all 100 Kaurvas. द्रुयोधन आदि सौ कौरव पुत्रों के पिता ; एक कुरूवंशी राजा। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेंत – Veinta. Cane, A stick. वेत्त, लाठी ” संज्वलन मान कषाय का दृष्टन्त “
धान्य मान प्रमाण Measuring unit for cereals. धान्य मापने का एक मान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूक संज्ञा–Muuk Sangya. An infraction of meditative relaxation or posture of meditation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार” गूंगे की भाति हुनकर कटे हुए खड़े होना, अंगुली से किसी वस्तु की ओर संकेत करते हए खड़े होना”
एकांत स्थान Absolute place, Secluded place. जहाँ किसी का आना जाना न हो ऐसा शून्य स्थान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
धर्मसागर स्वामी (सिंहसंघ) A writer who wrote ‘Jeev Vichar’, Saptatatvi etc. books. जीव विचार, सप्ततत्वी, नयचक्र, नवपदार्थी, द्रव्यचक्र आदि के कर्ता।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
एक हजार आठ A number – 1008 (characteristics of Tirthankar – Jaina Lord. तीर्थंकर भगवान के 1008 लक्षण होते हैं। सहस्रनाम स्तोत्र में भवान के 1008 नाम हैं। सहस्रनाम विधान में 1008 अध्य्र हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]