निषध पर्वत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषध पर्वत – Nishadha Parvata. Name of a mountain situated in Jambudvip (an island). जम्बूद्वीप के 6 कुलाचलों में तीसरा पर्वत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषध पर्वत – Nishadha Parvata. Name of a mountain situated in Jambudvip (an island). जम्बूद्वीप के 6 कुलाचलों में तीसरा पर्वत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्ष्मण पुरी – वर्तमान लखनउ। Laksmanapuri-The old name of the present Lucknow
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिक्षागुरु – Shikshaaguru. Teacher, spiritual teacher, religious preceptor-saints. व्यवहारिक शिक्षा प्रदान करने वाले गुरु-इन्हें विद्यागुरु भी कहते हैं ” आगम ग्रंथों का अध्ययन कराने वाले ” निर्यापकाचार्य जो संयम (देश या सकल) के छेड़ की शुद्धि के लिए प्रायश्चित देकर संवेग व वैराग्य जनक परमागम के वचनों द्वारा साधू का संवरण करते हैं ”…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय हिंसक – Nishchaya Hinsaka. One who has not given up attachment, malice etc. जो प्रमाद व राग द्वेष आदि से सहित है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योजना – कार्य रूपरेखा, नोआगम भावयोग के 3 भेदो मे एक भेद मन वचन काय का व्यापार। Yojana-Planning, activities of mind, speech & body
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शास्त्र तात्पर्य – Shaastra Taatparya. Scriptural meanings. सूत्र के दो भेदों में एक भेद; परमार्थ से साक्षात मोक्ष के कारणभूत वीतरागपना या भेद ज्ञान ही शास्त्र तात्पर्य है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय रत्नत्रय – Nishchaya Ratnatraya. To be engrossed completely into the soul with right faith, knowledge & conduct. आत्मा का श्रद्धान, आत्मा का ज्ञान और आत्मा में ही लीन होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदृश उत्पाद – Sadrsha Utpaada. Unchangeable properties of any matter (even in any kind of production). जैसे परिणमन करती हुई अग्नि उष्ण की उष्ण ही रहती है यह सदृश उत्पाद है ” और आम का फल हरितवर्ण से पीतवर्ण रूप हो जाता है यह असदृश उत्पाद है ” अथवा जीव का ज्ञानरूप परिणाम परिणमन…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शाकल्य – Shakalya. A doctrine of ignorance, An ignorent one. अज्ञानवाद के 67 भेदों में एक भेद या एक अज्ञानवादी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय दर्शन – Nishchaya Darshana. View of absolute perception (soul is supreme). परम चैतन्य की विलास रूप लक्षण वाली प्रतीति अर्थात् शुद्धात्म तत्व ही उपादेय है ऐसी दृढ़ प्रतीति ” इसका निश्चय चारित्र के साथ अविनाभावी संभव है “