सर्वविजय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वविजय – Sarvavijaya. Name of the 30th chief disciple of Lord Rishavhdev. भगवान ऋषभदेव के 30 वें गणधर ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वविजय – Sarvavijaya. Name of the 30th chief disciple of Lord Rishavhdev. भगवान ऋषभदेव के 30 वें गणधर ।
चौरार्थादान Acceptance of stolen materials. अचौर्याणुव्रत का एक अतिचार ; चोरी का लाया हुआ माल लेना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वदर्शित्व शक्ति – Sarvadarshitva Sakti. One of the powers acquired by the soul, power of all-seeing. जीव की एक शक्ति । सकल विष्व के सामान्य भाव को देखने रूप से (अर्थात लोकालोक को सत्तामात्र ग्रहण करने रूप से ) परिणमित ऐसी आत्मदर्षनमयी सर्वदर्षित्व शक्ति है।
छंदबद्ध चिट्ठी A letter written by Pandit Jaichand Chhabra. पं. जयचंद छाबड़ा (ई. १८३३) द्वारा लिखित अध्यात्म रहस्यपूर्ण एक पत्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्पगत नय – Sarvagata Naya. A standpoint believing soul as omnipresent. सर्वगत नय से आत्मद्रव्य खुली हुई आॅख की भांति सर्ववर्ती है।
चित्रवती A river of the east Arya Khand (region). पूर्व आर्यखण्ड की एक नदी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सराग श्रमण – Saraaga Shramana. Saints with auspicious attachments. अशुभ राग से रहित, व्रत आदि के शुभ राग से सहित मुनि सराग श्रमण कहलाते है।
इंद्रध्वज विधान A book written by Ganini Gyanmati Mataji related to Pooja-Vidhan (worshipping). गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी द्वारा मध्यलोक के 458 आकृत्रिम जिन-चैत्यालयों की पूजन हेतु रचित एक अनुपम कृति (ई.स.1976)। वर्षा के अभाव में इस विधान को करने की प्राचीन परम्परा है। वर्तमान में अपने मनोरथों की सिद्धि हेतु भी लोग इस विधान…
चिंतामणि यन्त्र A metallic plate engraved with some auspicious and mystic words. मंत्र लिखित एक धातु की प्लेट।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यग्मिथ्यात्व प्रकृति – Samyagmithyaatva Prakriti. Right-cum-wrong Karmic nature related to faith. दर्शन मोह की दूसरी प्रकृति जिसके उदय से यथार्थ व मिथ्या दोनो प्रकार का मिश्रित श्रद्वान है।