द्वयर्धगुणहानि!
द्वयर्धगुणहानि A type of decreasing series. गुणहानि आयाम को ड्योढ़ा (द्वयर्ध) करने पर जो प्रमाण प्राप्त हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वयर्धगुणहानि A type of decreasing series. गुणहानि आयाम को ड्योढ़ा (द्वयर्ध) करने पर जो प्रमाण प्राप्त हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रोत्रिय – Shrotriya. One who has thoroughly studied the scriptures. श्रुत शास्त्र के जानने वाले श्रोत्रिय कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयोजन – Sanyojan. The act of joining or mixing. A fault related to saint-food. मिलाना, आहार सम्बन्धी एक दोष “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुताज्ञान – Shrutaagyaana. False scriptural knowledge. मिथ्याश्रुतज्ञान; चौरशास्त्र, हिंसा शास्त्र तथा महाभारत, रामायण आदि के परमार्थ शून्य होने से साधन करने के अयोग्य उपदेश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सतालक – Sataalaka. A type of peripatetic deities. पिशाच जाति व्यंतरों के 14 भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतगुरु – Shrutaguru. Spiritual preceptor. जो प्रायश्चित देकर संवेग व वैराग्य जनक परमागम के वचनों द्वारा साधु का संवरण करते है वो निर्यापक है ” उन्हें ही शिक्षा गुरु या श्रुत गुरु भी कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्तवक – Sanstavaka. The 2nd Patal (layer) of the 2nd hell. दूसरे नरक का दूसरा पटल “
आन्तरिक सज्जा Interior decoration or furnishing. भीतरी सजावट।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ब- देवनागरी वर्णमाला का तेर्इसवाँ व्यंजन, इसका उच्चारण दोनों ओठों को मिलाकर किया जाता है। Ba- The 23rd constant of the devnagri syllabus
इंद्रियजय Sensual restraint, subjugation. पाँचों इन्द्रियों को ज्ञान वैराग्य उपवास आदि के द्वारा वस में रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]