दर्शनशुद्धि (शास्त्र)!
दर्शनशुद्धि (शास्त्र) A book written by Acharya ‘Chandraprabh Suri’. आचार्य चन्दप्रभ सूरि (ई.1102) द्वारा रचित एक न्याय ग्रन्थ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दर्शनशुद्धि (शास्त्र) A book written by Acharya ‘Chandraprabh Suri’. आचार्य चन्दप्रभ सूरि (ई.1102) द्वारा रचित एक न्याय ग्रन्थ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति संक्रम योग्य – Prakrti Samkrama yogya. Karmic natures capable of transition. संक्रमण होने योग्य कर्म प्रक्रतियां “
तेजोजराशि A mathematical quantity, A chief disciple of Lord Rishabhdev. जिस राशि को चार से अवहृत (भाग) करने पर शेष तीन अंक रहते हैं, भगवान ऋषभदेव का 62 वां गणधर (तेजोराशि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रातर- मध्य आर्यखण्ड का एक देष। Pratara- A country of middle Arya Khanda (region)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणघातिकी हिंसा- प्रमाद योग से किसी जीव के प्राणों का घात करना। PranaghatikiHinsa- A type of violence, Killing
तैजस शरीर बंध A kind of bond of lustrous molecules (reg. body). 5 प्रकार के बंधन नामकर्म के भेदों में एक भेद, गृहीत तैजस पुद्गल स्ंकधों का परस्पर मिल जाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहिर्मुखी- आत्मा से हटकर बाह्य पदार्थो की ओर जिसकी दृटि हो। Bahirmukhi- extroverted one
दर्शन कथा A sacred legend . सति मनोवती नामक एक कन्या द्वारा गजमोती चढ़ाकर जितेन्द्र भगवान के दर्शन करने की एक प्राचीन रोमांचक कथा जिस पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने ‘प्रतिज्ञा’ नामक धार्मिक उपन्यास लिखा है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलदत्त- सुपाश्र्वनाथ भगवान के मुख्य गणधर का ना (अपरनाम- बल, बलित्त, बलि)। Baladatta- name of chief disciples of lord suparshavnath