सत्पुरुष :!
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्पुरुष : == दट्ठूण अण्णदोसं, सप्पुरिसो लज्जिओ सयं होइ। —भगवती आराधना : ३७२ सत्पुरुष दूसरे के दोष देखकर स्वयं में लज्जा का अनुभव करता है। (वह कभी उन्हें अपने मुंह से नहीं कह पाता)।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्पुरुष : == दट्ठूण अण्णदोसं, सप्पुरिसो लज्जिओ सयं होइ। —भगवती आराधना : ३७२ सत्पुरुष दूसरे के दोष देखकर स्वयं में लज्जा का अनुभव करता है। (वह कभी उन्हें अपने मुंह से नहीं कह पाता)।
गिरिपात Falling from a precipice (steep mountain etc.) पर्वत से गिरना, लोकमूढता;धर्मं लाभ मानकर पर्वत से गिरना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == नम्रता : == किंदि रिंता वि नमंति मग्गणत्थं धरंति जे जोयं। ताण धणूण व पुरिसाण कह णु मा होउ टंकारो।। —गाहारयण कोष : १२९ करोड़ों का धन देकर भी जो नम्र है और जो याचकों के लिए ही जीवन धारण करता है, ऐसा धनुष और पुरुष क्यों नहीं…
गुणाधिक Super virtuous personalities (reg.right knowl- edge etc.). जो सम्यग्यानादि गुणों में बढे चढ़े हैं वे गुणाधिक हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वविद् – Poorvavid. One ominiscient, having scriptual knowledge (Shrutgyan). श्रुतकेवली “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूति – Bhuti. Name of the 24th chief disciple of Lord Rishabhadev. भगवान वृषभदेव के ८४ गणधरों में २४ वें गणधर का नाम “
दर्शन पंडित One having destructional-cum-subsidential right perception. क्षायिक , क्षायोपशमिक और औपशमिक सम्यग्दर्शन से जीव दर्शन पंडित होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्व तालका – Poorva taalakaa. Place of getting omniscience by Lord Rishbhdev. See – Purimtaala. ऋषभदेव भगवान के केवलस्थान का नाम ” देखें – पुरिमताल “
खेद Pain, sorrow, Affliction. अनिष्ट की प्राप्ति होना, दुख ,शोक, अवसाद । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूधरदास – Bhudharadasa. Name of a writer who wrote Parshvanath Puran, Pada Sangrah (poetic compositions) etc. many great books. पाशर्वनाथपुराण; जैन शतक, पद संग्रह आदि के कर्ता “