उष्माहार!
उष्माहार One of the figs – a fruit, not edible according to Jain philosophy . देखें-ओजाहार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उष्माहार One of the figs – a fruit, not edible according to Jain philosophy . देखें-ओजाहार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यगति प्रायोग्यानुपूर्वी – Manushyagati Praayogyaanupuurvi. Transmigratory state of soul as in previous shape while going towards human birth. जिस कर्म के उदय से मनुष्य गति में जाते हुए जीव के पूर्व शरीर के समान आत्मा के प्रदेशों का आकार बना रहे “
उष्ट्रकूट श्रेणी Camel back range . ऊँट की पीठ की तरह प्रदेशों की निषेक रचना को उष्ट्रकूट श्रेणी कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेमकूट – Hemakuuta. Name of the 40th city in the south of Vijayardh mountain. विजयार्ध पर्वत की दक्षिणी श्रेणी का 40वां नगर।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यपर्याप्तक – अपर्याप्तक नाम कर्म के उदय से जो जीव अपने योग्य पर्याप्तियों को पूर्ण किए बिना ही ष्वास के 18 वें भाग में मरण को प्राप्त हो जाता है अर्थात जिसके एक भी पर्याप्ति पूर्ण नही होती उसे लब्ध्यप्र्याप्तक कहते है। Labdhyaparyaptaka-Absolutely, non development beings (Having very short life)
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हृदिनंदि – Hrdinandi. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंध बलात्कारगण भट्टारक आम्नाय वारां गट्ठी के एक भट्टारक विश्वचन्द्र के षिष्य। समय वि. 1156।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राज्यातिक्रम – करवंचन – राज्य नियमों के विरूद्ध टैक्स चुडी बचाना आदि अस्तेय व्रत का एक अतिचार। Rajyatikarma-Tax evasion
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हिरण्यगर्भ – Hiranyagarbha. One of the 1008 names of lord Rishabhdev. भगवान ऋषभदेव के 1008 नामांे मे से एक। जब भगवान गर्भ मे थे तभी सुवर्णमय हो गई थी और आकाश से देवो ने सुवर्ण की वृष्टि की थी, इसलिए भगवान का नाम हिरण्यगर्भ भी है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परम अद्वैत: Another name of Mokshmarga & path of salvation, Ultimate state of bliss.निर्विकल्प समाधि अथवा निष्चय मोक्ष मार्ग का अप रनाम ।