स्वसहाय!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसहाय – Svasahaya. Absolutely independent. स्त्। जो स्वभाव से ही सिद्व है, इसलिये वह अनादि अनंत है स्वसहाय है, निर्विकल्प है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसहाय – Svasahaya. Absolutely independent. स्त्। जो स्वभाव से ही सिद्व है, इसलिये वह अनादि अनंत है स्वसहाय है, निर्विकल्प है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव लोकोत्तर मान – Bhava Lokottara Mana. Extent of knowledge (Nigod to Supreme state). जघन्य से उत्क्रष्ट अवस्था तक का ज्ञान जिससे मापा जाय अर्थात् लब्ध्य-पर्याप्तक सूक्ष्म निगोदिया जीव के जघन्य पर्याय श्रुतज्ञान से लेकर अर्हतों के उत्क्रष्ट केवलज्ञान तक का प्रमाण “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णमध्य – Svarnamadhya. Another name of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत का अपरनाम।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यज्ञायक शरीर – Bhavyagnayaka Sarira. One who is going to be learned one in future. नो आगम द्रव्य का एक भेद; जो कर्म के स्वरूप को कहने वाले शास्त्र का जानने वाला आगे होगा वह भव्यज्ञायक शरीर कहलाता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सन्यास मरण – Sanyaasa Marana. The holy death of an ascetic. मुनि व्रत धारण कर पंडित मरण करना
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुप विपर्यास – Svaruupa Viparyaasa. A contary viewpoint regarding the form of a matter. मिथ्यात्व। जिस पदार्थ का जो लक्षण है उससे विपरीत उसका स्वरुप समझना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संतोष भावना – Santosha Bhaavanaa. Attitude of equanimity or satisfaction. मान अपमान में समता रखना, अशन पान आदि के यथायोग्य लाभ में समता रखना संतोष भावना है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैद्यसार –Vaidyasara Name of an Ayurvedic book written by AcharyaPujyapad. आचर्य पूज्यपाद (ई. श. ५) कृत आयुर्वेद विषयक एक संस्कृत ग्रंथ “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्षमा : == यदि किन्चित् प्रमादेन, न सुष्ठु यस्माभि: सह र्विततं मया पूर्वम्। तद् युष्मान् क्षमयाम्यहं, नि:शल्यो निष्कषायश्च।। —समणसुत्त : ८७ अल्पतम प्रमादवश भी यदि मैंने आपके प्रति उचित व्यवहार नहीं किया हो तो मैं नि:शल्य और कषायरहित होकर आपसे क्षमा—याचना करता हूँ। कोहेण जो ण तप्पदि, सुर–णरतिरिएहि…
ऐन्द्रिय सुख Sensual pleasure. इन्द्रियों के द्वारा प्राप्त क्षणिक सुख।[[श्रेणी:शब्दकोष]]