यमलीक!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमलीक–Yamaliik. Name of an omniscient personality in the assembly of Lord Mahavira. भगवान् महावीर के तीर्थ में हुए एक अन्कृत केवली”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमलीक–Yamaliik. Name of an omniscient personality in the assembly of Lord Mahavira. भगवान् महावीर के तीर्थ में हुए एक अन्कृत केवली”
घाती कर्म प्रकृति Nature of destructive Karmas. २६ देशघाती एवं २१ सर्वघाती कर्म प्रकृतियाँ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भ्रमराहार:Accepting food-donation by saints without causing any difficulty to the donor. दाताओं को किसी भी प्रकार की बाधा पहुँचाये बिना मुनि द्वारा कुशलता से आहार लिया जाना ” इसे भ्रामरी वृत्ती भी कहते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर कथा – Bhaktamara Katha. Name of tales written by Pandit Raymallaji and Jaichand Chhabda. पं. रायमल्ल (ई. १६१०) एंव पं. जयचन्द छाबड़ा (ई. १८१३) द्वारा रचित कथा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगोपभोग परिमाण व्रत:Vow of restricting worldly sensual enjoyments. शिक्षा व्रत का एक भेद; इसमें भोग उपभोग सम्बन्धी पदार्थो का परिमाण किया जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Supreme soul. संसारी जीवो मे से जो उत्कृष्ट आत्मा बन जाती है उसे परात्मा कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्रदु भाषण–Mradu Bhashan. Soft and sweet speech. मधुर एवं विनम्र वचन या उपदेश, भाषा समिति; प्रिय, मधुर या हितकारी वचनों का प्रयोग करना”
ग्राम Village, Rural place. बाड़ , आवृत , उद्यान और जलाशयों से युक्त कृषकों आदि की निवास भूमि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]