वाक् (वचन)!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक् (वचन) – Vaak (Vachana). Different types of speech. शुभ –अशुभ रूप बोलने अथवा उच्चारण करने की क्रिया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक् (वचन) – Vaak (Vachana). Different types of speech. शुभ –अशुभ रूप बोलने अथवा उच्चारण करने की क्रिया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमावगमेश – Panchamaavagamesha. Omniscient one. पंचमज्ञान, केवलज्ञान के स्वामी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्ष्मणा – राजा महासेन की रानी जो कि तीर्थकर चद्रप्रभ की माता थी। Laksmana-Mother’s name of lord Chandraphrabh
उपेक्षा Indifference, Negligence, Overlooking . रागद्वेष रूप परिणामों का नहीं होना वैराग्य संबंध न रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धि – प्राप्ति सम्यक्त प्राप्ति की पूर्व सामग्री, क्षयोपषन विषुद्धि प्रायोग्य देषना करण 5 लब्धिया जीव मे संयम या संयमासंयम आदि को धारण करने की योग्यताएं। अंतराय के क्षयोपषन से प्राप्त षक्ति दान लाभ भोग उपभोग वीर्य क्षायिक आदि 9 लब्धियां। Labdhi-Attainment, Different types of gain for getting salvation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसुमित्र – Vasumitra.: Name of the 36th chief disciple of Lord Rishabhdev,Name of the chieftain of Shak dynasty. तीर्थंकर ऋषभदेव के 36वें गणधर “मगध देश की राज्य वंशावली अनुसार यह शक जाति का सरदार था ,अपरनाम बलमित्र अग्रिमित्र का समकालीन था ,समय –वी. नि. 285-345 “
उभयोदयबंधी प्रकृति Numerous space points in bilateral extremes . जो कर्म प्रकृति अपना उदय होने अथवा न होने पर भी बंधती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगीन्द्रसागर – आचार्य समन्तिसागर महाराज अंकलीकर के एक प्रसिद्ध षिश्य बालाचार्य। समय ई ष 20 – 21 Yogindrasagara-Name of a saint, The disciple of Acharya shri Sanmatisagar maharaj
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसंत – Vasanta. : Another name of Sumeru mountain. सुमेरुपर्वत का अपरनाम “