ऋद्धीश!
ऋद्धीश 13th Patal (layer) of Saudharma heaven. सौधर्म स्वर्ग का 13 वाँ पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋद्धीश 13th Patal (layer) of Saudharma heaven. सौधर्म स्वर्ग का 13 वाँ पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋत Fixed order, Truth, Pain, Trouble. ऋत का अर्थ सत्य एंव दुःख दोनों में लिया जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमेश्वर:Name of 16th Tirthankar (Jaina-Lord) of past era, Supreme sould-Lord Arihant & Siddha.भूतकालीन 16 वें तीर्थकर, परमात्का, अहंत व सिद्व भगवान ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमुख उदय:Annihilation of Karmic nature (in transformed form)।जो कर्म प्रकृति अन्य प्रकृति रूप होकर उदय में आती है। जैसे -नरकगति, देवगति, वैक्रियिक शरीर आदि कर्म प्रकृतियाॅं ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधर्म्य उदाहरण – Saadharmya Udaaharana. Smoke showing existence of fire, an example of means with its relative objects. जो जो धूमवाला है वह वह अग्नि वाला है जैसे -रसोईघर ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातिशय मिथ्यादृष्टि – Saatisaya Mithyaadrsti. Wrong believers who are going to attain right belief. प्रथमोपशम सम्यक्तव के अभिमुख जीव सातिशय मिथ्यादृष्टि कहलाते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतरागचारित्र –Vitaragacharitra. Deep engrossment in meditation by great Jainasainits. रागादि विकल्पों से रहित होकर आत्मा में रमणता या लीनता ” शुक्ल्ध्यान, शुध्दोपयोग, उपेक्षा संयम, निश्चय चारित्र, वीतरागचारित्र ये एकार्थवाची हैं ” ये सम्यग्दृष्टि जीवों के होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेगवती –Vegavati Name of a river of Bharat Kshetra (region) भरतक्षेत्र की एक नदी “
ऊर्ध्वग्रैवेयक An upper most spatial region. 16 स्वर्ग से ऊपर नौ ग्रैवेयक में सुमनस सौमनस प्रीतिंकर नाम के विमान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीर्य प्रवाद –ViryaPravada A part of Shrutgyan (scriptural knowledge) containing the description of the power of soul. दृष्टिवाद – १२वे अंग का तीसरा पूर्व, जिसमे आत्मा – अनात्मा की शक्ति का कथन हैं ” इसके ७० लाख माध्यम पद हैं “