पुरुषत्त्व!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषत्त्व – Purusattva. Man hood, Manliness, Virility. पुरुषता- पुरुषपने के समस्त गुणों से युक्त “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषत्त्व – Purusattva. Man hood, Manliness, Virility. पुरुषता- पुरुषपने के समस्त गुणों से युक्त “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविन्द्र कुमार बह्यचारी – गणिनिप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के एक प्रमुख षिश्य जम्बद्वीप रचना हस्तिनापुर के प्रमुख स्तम्भ।सन् 1972 में आजन्म ब्रहमचार्य व्रत लेकर क्रमष घर्मक्षेत्र में अथक परिश्रम करके माताजी की प्रेरणा से जम्बुद्वीप हस्तिनापर, तपस्थली प्रयाग, कुण्डलपुर, मांतुगा, अयाध्या एवं अनेक तीर्थ क्षेत्रो का विकास करते हुए जैन धर्म की संस्क्ति का…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसंग्रह – Puranasamgraha. Name of books pertaining to the life history of Jaina-Lords. आचार्य दामनन्दि, श्रीचन्द्र आदि आचार्यों द्वारा २४ तीर्थंकरों के जीवन चरित्र के आधार पर रचित इस नाम के कई ग्रंथ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञाभाव छेदना – Pragyaabhaava Chhedanaa. Sagacious knowledge related to 6 entries (dravyas). मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान के द्वारा छह द्रव्यों का ज्ञान होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रवि – सूर्य, राक्षस वंषी एक विद्याघर राजा। Ravi-The sun, Name of a king of Rakshsas dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविवार व्रत – विषेश प्रकार से नौ वर्शों तक रविवार के दिन किया जाने वाला एक व्रत। Ravivara Vrata- A particular type of vow or fasting to be observed with specified procedure on sun day
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मोह-विजय : == णिस्सेसखीणमोहा, फलिहामलभायणुदयसमचित्तो। —पंचसंग्रह : १-१५ जिसने सम्पूर्ण मोह को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, उस निर्मोही का चित्त स्फटिक मणि के पात्र में रखे हुए स्वच्छ जल की भाँति निर्मल हो जाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रयणसार – आचार्य कुन्दकुन्द कृत 167 प्राकृत भाशाओं में निबद्ध गं्रथ। Rayanasara-name of a treatise by Acharya Kund Kund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदकल्पना – सापेक्ष – अशुद्ध – द्रव्यार्थिक नय –A kind of viewpoint which differentiate the relation of properties (virtues) and its possessor (matter). नय; जो द्रव्य में गुण-गुणी का भेदकर के उनमेंसम्बधं स्थापित करता है, जैसे द्रव्य गुण व पर्याय वाला है अथवा जीव ज्ञानवान्है “