पंच भ्रष्ट मुनि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच भ्रष्ट मुनि – Pancha Bhrashta Muni. Saint with five types of faults. पार्श्वस्थ, कुशील, संसक्त (आहार का लोभी), अपगत (ज्ञान रहित), मृगचारी (स्वछन्द अर्थात् अनर्गल विहारी) मुनि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच भ्रष्ट मुनि – Pancha Bhrashta Muni. Saint with five types of faults. पार्श्वस्थ, कुशील, संसक्त (आहार का लोभी), अपगत (ज्ञान रहित), मृगचारी (स्वछन्द अर्थात् अनर्गल विहारी) मुनि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसार टीका – आचार्य नंेतिचन्द्र कृत संस्कृत संजीवनी टीका तथा पं टोडरमल कृत भाशा टीेका। Labdhisara Tika-name of a commentary book written by Acharya Nemichandra and by pandit Todarmal
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वांछा – Vaanchaa.: Desire,Longing, a type of passion. इच्छा ,अभिलाषा “इसे ही परिग्रह कहा गया है “
उषित अन्न Stale food, Not edible. बासी व अमर्यादिक भोजन, अग्नि पर पकाये हुए अथवा गर्म घी में पकाये हुए पदार्थ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसुनंदि – Vasunandi.: Name of different Acharyas of Nandi group. नंदिसंघ देशीयगण के एक आचार्य ,जिनका अपरनाम जयसेन था “श्रावकाचार ,प्रतिष्ठासार संग्रह ,मूलाचार वृत्ति, आप्तमीमांसा वृत्ति ,जिनशतक,वस्तु आदि के रचयिता ” समय –ई.स. 1068-1118 “इस नाम के और भी कई आचार्य हुए हैं “
उभयशुद्धि सम्यग्ज्ञान का एक अंग व्यंजन और उसके वाच्य (अर्थ) अभिप्राय की शुद्धि उभयशुद्धि है। अपरनाम तदुभयशुद्धि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वशवर्तिता – Vashavartitaa.: An example of power of Karmas, fruition of Karmas causing developments of sense organs. कर्म की बलवत्ता का एक उदाहरण; नाम कर्मोदय की वशवर्तिता से इन्द्रियां उत्पन्न होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नश्रवा – सुमाली का पुत्र तथा रावण का पिता। Ratnasrava- Father’s name of ravan
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्धमानक – Vardhamaanaka. Name of the dancing hall of Chakravarti (emperor) Bharatesh. चक्रवर्ती भरतेश की नृत्यशाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचचूलिका – Panchachoolikaa. Five subkinds of scriptural knowledge (shrutgyan). श्रुतज्ञान के 12वें दृष्टिवाद अंग प्रभेद; जलगता, स्थालगता, मायागता, रुपगता एवं आकाशगता चूलिका “