त्रिदंशजय!
त्रिदंशजय A king of Ikshvaku dynasty. इक्ष्वाकुवंश का एक राजा । अंत में पुत्र को राज्य सौंपकर दीक्षा ली थी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिदंशजय A king of Ikshvaku dynasty. इक्ष्वाकुवंश का एक राजा । अंत में पुत्र को राज्य सौंपकर दीक्षा ली थी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरत्याग – Shareeratyaaga. Renouncement related to the attachment of body. व्युत्सर्ग तप या व्युत्सर्ग प्रायश्चित (कायोत्सर्ग), नियत व अनियत काल के लिए शरीर से ममत्व बुद्धि छोड़ना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्र – 88 ग्रहो में एक, तीसरे रूद्र एवं तीसरे नारद का नाम, जिनदीक्षा लेने के उपरान्त संयम भ्रष्ट होकर रौद्र कार्य करने लगते है। ये दसवें विद्यानुवाद पूर्व का अध्ययन करते समय विशयासक्त होकर तप से भ्रष्ट हो जाते है। और नरकगामी होते है।रूद्र 11 होते है। Rudra-name of a planet, Name of…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्कार – Satkaara. Respect, Reverence, Honour, Reception. आदर, सम्मान, विनय, पूजा-प्रशंसा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्ता-गौण उत्पाद-व्यय ग्राहक नय – Satta-Gauna Utpaada-Vyaya Graahaka Naya. A standpoint emphasizing the property of production & destruction of matterds reather than their permanence. पदार्थ में विद्यमान गुणों की अपेक्षा को मुख्य न करके उत्पाद व्यय ध्रौव्य के आधीनपनें रूप से द्रव्य को विनाश व उत्पत्ति स्वरुप माननेवाला सत्तानिरपेक्ष या सत्ता-गौण उत्पाद-व्यय ग्राहक नय…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगसंक्रमण – योग सक्रान्ति प्रथम षुक्लध्यान में मन वचन काय योगो का पलटना। Yogasamkramana- Transition of all activities (related to mind speech & body) in auspicious & sacred mode
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यक्षर – अक्षर के तीन भेदो मे एक भेद, सूक्ष्म निगोेद लब्ध्यापर्याप्तक से लेकर श्रुत केवली तक जीवो के जितने क्षयोपषम होते है उन सबकी लब्ध्यक्षर संख्या है। Labdhyaksara- Destructional cum subsidential state of karmas of all beings