राजवातिैक!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवातिैक – आचार्य अकलंक देव द्वारा तत्वार्थसूत्र गं्रथ पर की गई विस्तृत संस्कृत वृत्ति। Rajavartika-name of a treatise written by Acharya Akalank dev
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवातिैक – आचार्य अकलंक देव द्वारा तत्वार्थसूत्र गं्रथ पर की गई विस्तृत संस्कृत वृत्ति। Rajavartika-name of a treatise written by Acharya Akalank dev
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मीना–Miina. Name of the chief Aryika (Ganini) in the assembly of Lord Suparshvnath. तीर्थंकर ससुपार्श्वनाथके समवशरण में विघमान 3 लाख तीस हजार आर्यिकाओ में मुख्य आर्यिका (गणिनी)”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्तोदा (कुंड) – 1 – 32 विदेहो में गंगा सिन्धु आदि 64 नदियो में रक्तोदा नदी का कुंड जो नील व निशध पर्वत के मूल भाग में स्थित है, 2 – ऐरावत क्षेत्र में स्थित एक कंुड जिसमे रक्तोदा नदी गिरती है। Raktoda (Kumda)-Name of wide mouthed pools
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्ता (देवी) – रक्ता कुंड व रक्ताकूट की स्वामिनी देवी। Rakta (Devi)-Name of the female ruling deity of Raktakund & raktakuta
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुमिशुध्दि – Bhumishudhi. Act of purification of Lord of Land with religious obser- vances. पूजा – विधान – मंत्र आदि से भूमि शुद्ध करना “
दिगंतरक्षित A type of deities. लौकांतिक देवों का एक भेद इनकी संख्या 25025 है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रहोभ्याख्यान – सच्याणुव्रत का एक अतिचार स्त्री – पुरूशों की एकांत में की गयी चेश्टा को प्रकट करना। Rahobhyakhyana-Secret discloser of a couple (an infraction of true speech)
एकसंग्रह Acceptance of a devotee. प्रतिचारक मुनियों की स्वीकृति पूर्वक एक आराधक का ग्रहण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयम रक्षा – Sanyama Rakshaa. Strictly observing of restraints by Jaina saints. जैन साधु-संत द्वारा अपने संयम की रक्षा करना “
एकस्थानीय A type of Karmic fruitional bondage. अनुभाग बन्ध का एक नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]