प्रवचयनार्थ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचयनार्थ- श्रुतज्ञान का पर्यावाची नाम, जिस आगम में वचन औश्र अर्भ ये दोनों प्रकृश्ट अर्थात् निर्दोश है उस आगम की प्रवचनार्थ संज्ञा है। Pravacanartha- Another name of Shrutgyan, scriptural knowledge
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचयनार्थ- श्रुतज्ञान का पर्यावाची नाम, जिस आगम में वचन औश्र अर्भ ये दोनों प्रकृश्ट अर्थात् निर्दोश है उस आगम की प्रवचनार्थ संज्ञा है। Pravacanartha- Another name of Shrutgyan, scriptural knowledge
धृतिदेवी A female presiding deity of Tiginchha pond (Sarovar) and Dhrati summit situated at Nishadh mountain. निषध पर्वत पर स्थित तिगिंछ ह्रद व धृतिकूट की स्वामिनी देवी।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धृत A king of Kuru dynasty, Name of a summit of Nishadh mountain and its deity. कुरूवंश का एक राजा, निषध पर्वत का एक कूट व उसका देव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयाग- भगवान ऋशभदेव की दीक्षा एवं केवज्ञानकल्याणक भूमि (जहाँ भगवान ने प्रकृश्ट रुप से त्याग किया), वर्तमान इलाहाबाद (उ.प्र.)। युग के प्रथम केषलोंच, प्रथम जैनेष्वरी दीक्षा, प्रथम केवलज्ञान, प्रथम समवसरण एवं प्रथम आर्यिकादिक्षा की भूमि। पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती मातजी की प्ररण से ई. सन् 2001 में इस भूमि पर (इलाहाबाद-बनारस हाइवे पर) “तीर्थकर…
धाराचारण ऋद्धि A type of super natural power (violenceless movement). चारण ऋद्धि का एक भेद; जिसके प्रभाव से मुनि मेघों से छोड़ी गयर जलधाराओं में स्थित जीवों को पीड़ा न पहुंचाकर उनके ऊपर से जाते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमा प्रमेय- न्याय विशयक एक ग्रंथ। PramaPremeya- Name of book related to judicial matter
धवला टीका A book written by Acharya Virsen. आचार्य भूतबलि (ई. 136-156) कृत षट्खण्डागम ग्रंथ के प्रथम 5 खण्डों पर आचार्य वीरसेन स्वामी (ई. 816) द्वारा लिखित विस्तृत टीका। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाणंगुल- उत्सेधंगुल से 500 गुना बडा अंगुल। इससे पर्वत, द्वीप, समुद्र आदि का माप होता है। Pramanamgula- A broad measuring unit, A measure
धर्मानुराग Religious zeal or devotion. धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हुए उसका जीवन पर्यंत पालन करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]