तिर्यचगति नामकर्म प्रकृति!
तिर्यचगति नामकर्म प्रकृति A type of karmic nature causing Tiryanch Gati. वह कर्म जिसके उदय से तिर्यंच की पर्याय में जन्म हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तिर्यचगति नामकर्म प्रकृति A type of karmic nature causing Tiryanch Gati. वह कर्म जिसके उदय से तिर्यंच की पर्याय में जन्म हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चर्चिका A time unit. काल का एक प्रमाण , ८४ लाख हस्त प्रहेलिका प्रमाण काल , यह संख्यात काल का एक भेद है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यग्ज्ञानचंद्रिका – Samayagyaanachandrikaa. Name of a great book written by Pandit Todarmal. पं. टोडरमल जी (ई. सन् 1761) कृत अध्यात्म विषयक ग्रंथ।
तिक्त रस Pungent flavour, bitter in taste. कडुवा रस या स्वाद। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चूर्णसूत्र Epithet, Aphorism, a short remark which contains a great meaning. अल्प शब्दों में महान अर्थ का धारावाही विवेचन करने वाले पद चूर्णी सूत्र कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थलगता चूलिका – Sthalagataa Cuulikaa. A geat scriptural part of Drishtivad Anga.दृष्टिवाद अंग के अन्तर्गत चूलिका के 5 भेदो मे एक भेद। इसमे दो करोड़ 9 लाख 89 हजार दो सौ पद है। इसमे पृथिवी के भीतर गमन करने के कारणभूत मंत्र तंत्र और तपश्चरण व वास्तुविद्या तथा भूमि सम्बन्धी अन्य शुभश्षुभ लक्ष्णो का…
चतुर्दश महारत्न Fourteen jewels of Chakravarti (emperor). चक्रवर्ती के १४ रत्न ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मत्तगुणविहाण कव्व – Sammattagunavihaana Kavvya. Name of a book written in Apabhransh language by Shubhkirti. शुभकीर्ति द्वारा (ई. 1442) रचित अप्रभंष भाषाबद्व काव्य।