विरवित!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरवित –Viravit Name of the disciple of Sinhbal and spiritual teacher of Padmasen पुन्नाटसंघ की गुर्वावली के अनुसार सिंहबल के शिष्य तथा पश्नसेन के गुरु ” समय – ई. श. ७ अंतपाद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरवित –Viravit Name of the disciple of Sinhbal and spiritual teacher of Padmasen पुन्नाटसंघ की गुर्वावली के अनुसार सिंहबल के शिष्य तथा पश्नसेन के गुरु ” समय – ई. श. ७ अंतपाद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरति – Virati. To be free from worldly attachments or sins i.e. desirelessness. विरक्त होना, हिंसादी पापों से छुटना, उदासीनता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वत्स –Vatsa: Dear child, A country of Bharat Kshetra middle Arya Khand (region) ,The former country where Kaushambi, the birth place of Lord Padmaprabhu was situated,Name of a country of eastern Videh Kshetra (region). बालक के किये प्रयुक्त किया जाने वाला एक प्रिय उदबोधन , भरत क्षेत्र मध्य आर्य खंड का एक देश ,भगवान…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नो – No. Partial affirmation, Quasi, negation. एक अवयव; जो प्रायः ‘न’ की भांतिया किंचित् रूप में प्रयुक्त होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीलपताका – Sheelapataakaa. Name of a treatise written by Mahichadra in marathi language reg. Agnipariksha (fire test) of Sitaji महीचन्द्र कृत (ई. सन 1696) सीता की अग्नि परीक्षा विषयक मराठी भाषाबद्ध एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैमित्तिक उत्पाद – Naimittika Utpaada. Causal production. उत्पाद का एक भेद; परप्रत्यक्ष उत्पाद “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धर्मास्तिकाय : == धर्मास्तिकायोऽरतो—ऽवर्णगन्धोऽशब्दोऽस्पर्श:। लोकावगाढ: स्पृष्ट:, पृथुलोऽसंख्यातिकप्रदेश:।। —समणसुत्त : ६३१ धर्मास्तिकाय रसरहित है, रूपरहित है, गंधरहित है और शब्दरहित है। समस्त लोकाकाश में व्याप्त है, अखण्ड है और विशाल है तथा असंख्यातप्रदेशी है। उदकम् यथा मत्स्यानां, गमनानुनुग्रहकरं भवति लोके। तथा जीवपुद्गलानां, धर्मद्रव्यं विजानीहि। —समणसुत्त : ६३२ जैसे इस…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रदंत – Vajradant Past-birth father of Lord Vasupujay, Father-in-law of Vajrasangh, the Chakravarti (emperor) of Pundrikini city. तीर्थंकर वासुपूज्य के पूर्वभव के पिता ,पुण्डरीकिणी नगर के चक्रवर्ती वज्रसंघ का श्वसुर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिदेव – Nemideva. Spiritual teacher of Somdeva who wrote a book ‘Yashastilak’. यशस्तिलक के कर्ता सोमदेव (ई. 959) के गुरु “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संव्यवहरण दोष – Sanvyavaharana Dosha. A fault related to saint food, careless activities in offering food to saint. श्रावक के निमित्त से होने वाला जैन साधुओं के आहार का एक दोष ” साधु को आहार देने के लिए बर्तन आदि को शीघ्रता से बिना देखे उठाना संव्यवहरण दोष है “