पारिषद्देव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिषद्देव – Parisadadeva. Friendly deities of a council. इन्द्र सभा के सदस्य देंव, जो सभा में मित्रवत् होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिषद्देव – Parisadadeva. Friendly deities of a council. इन्द्र सभा के सदस्य देंव, जो सभा में मित्रवत् होते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव (सचित्त , अचित्त , मिश्र ) – Bhava(Sachitta, Achitta, Mishra). Reflections. जीव द्रव्य सचित भाव है , पुदगल आदि ५ द्रव्य अचित भाव हैं एंव पुदगल और जीव द्रव्यों का संयोग मिश्र भाव है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमंदर – Sumamndra. Name of a mountain of Bharat Kshetra (region) भारत क्षेत्र का एक पर्वत ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारमार्थिक – Paramarthika. Having to do with supreme truth or spiritual reality. सर्वोपरि सत्य अथवान उत्कृष्ट अर्थ की सिद्धि करने वाला “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुप्ति : == संरम्भे समारम्भे, आरम्भे च तथैव च। वच: प्रवर्तमानं तु, निवर्तयेद् यतं यति:।। —समणसुत्त : ४१३ यतना—सम्पन्न यति संरम्भ, समारम्भ व आरम्भ में प्रवत्र्तमान वचन को रोके—उसका गोपन करे। क्षेत्रस्य वृत्तिर्नगरस्य, खातिकाऽथवा भवति प्राकारा:। तथा पापस्य निरोध:, ता: गुप्तय: साधो:।। —समणसुत्त : ४१५ जैसे खेत की रक्षा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेप्यकर्म – lepyakarm.: Preparing statues by soil , sand , grass etc. त्रण , बालू , मिट्टी आदि से प्रतिमायें निर्मित करना लेप्यकर्म कहा जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पानदशमी व्रत- Panadasami Vrata. Taking food after offering food to other 10 persons. एक व्रत ; दस श्रावकों को भोजन करा कर फिर स्वयं भोजन करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्र केसरी:Name of an acharya who wrote patrakesari stotra etc, a reverential titile of acharya vidyanandi (775-840 A.D.) एक आचार्य (ई0 6-7) जिन्होने पात्रकेसरी स्तोत्र जिनेन्द्रगुण स्तुति आदि ग्रंथो की रचना की। वार्तिककार आचार्य विद्यानंदि (ई0 775-840) की उपाधि।