देवच्छंद!
देवच्छंद A special place (Garbhgrah) in natural (eternal) temples. अकृत्रिम चैत्यालयों के एक विशेष स्थान का नाम (गर्भगृह)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवच्छंद A special place (Garbhgrah) in natural (eternal) temples. अकृत्रिम चैत्यालयों के एक विशेष स्थान का नाम (गर्भगृह)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आहारपर्याप्ति Food offering with devotion to saints. एक शरीर को छोड़कर दूसरे नवीन शरीर के बिना कारणभूत जिन नोकर्म वर्गणाओं को जीव ग्रहण करता है उनको खलरसभाग परिणमाने की प्र्याप्त नामकर्म के उदय से रहित जीव की शक्ति का पूर्ण हो जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निनार्मिक – Ninaarmika. The so of king Gangdev who took birth later as the 9th Narayana ‘Krishna’. राजा गंगदेव का जिसने मुनि बन तपस्या की और अगले भाव में ‘कृष्ण’ नामक नवां नारायण हुआ “
देवगति (देव सामान्य) Celestial form, Divine life course. संसार परिभ्रमण की 4 गतियों (देव, नारकी, मनुष्य, तिर्यंच) में से एक गति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति Chief and secondary parts of Aharak Sharir. वह नामकर्म प्रकृति जिससे आहारक शरीर बनता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जरा अनुप्रेक्षा – Nirjaraa Anuprekshaa. Contmplation on dissociation of karmas निर्जरा में निमित ऐसे अनशन आदि 12 प्रकार के तप का विचार करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरुद्ध अविचार भक्त प्रत्याख्यान – Niruddha Avichaara Bhakta Pratyaakhyaana. Slow renunciation of food for ritualistic death. सल्लेखना की एक विधि-रोग से पीड़ित हो जाने के कारणजिसका जंघाबल क्षीण हो गया हो, ऐसे मुनि इस विधिपूर्वक समाधि ग्रहण करते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकार उपयोग – Nirakaara Upayoga . Apprehension of shapelessness. दर्शनोंपयोग; जिसमें आकार रहित पदार्थ का सामान्य आभास होता है ” अर्थात् निश्चयरहित ज्ञान का नाम निराकार उपयोग है “
दूरास्वादित्व ऋद्धि Super distantial attainment of taste. जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को रसना इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित खटटे, मीठे आदि अनेक प्रकार के रसों का स्वाद लेने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]