मीमांसा!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मीमांसा–Meemansa. Philosophical investigation or examination, Disquisition. अवग्रह के द्वारा ग्रहण किआ अर्थ विशेष रूप से जिसके द्वारा मीमांसित किया जाता है अर्थात विचार जाता है वेह मीमांसा होता है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मीमांसा–Meemansa. Philosophical investigation or examination, Disquisition. अवग्रह के द्वारा ग्रहण किआ अर्थ विशेष रूप से जिसके द्वारा मीमांसित किया जाता है अर्थात विचार जाता है वेह मीमांसा होता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचेन्द्रिय तिर्यच – Panchendriyatiryacha. Five sensed Tiryach beings (animals etc.). पांच इन्द्रियों वाले तिर्यच इनके जलचर, नभचर, थलचर, के भेद से तीन भेद है “
थावर प्रतिमा Stable image of any thing. व्यवहार से चंदन, कनक, महामणि, स्फटिक आदि से बनी प्रतिमा थावर कहलाती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्ल लेश्या – Shukla Leshyaa. Purest or stainless volitional colouration (white)i.e. disattachment or aversion from worldly 6 लेश्याओं में अंतिम लेश्या; वैराग्य से समन्वित अतिमंद कषायरूप भाव “
त्रैराशिकवाद Doctrine related to the conception of trio thoughts (like Jiva, Ajiva, Jiva-ajiva etc.). सर्व वस्तुओं को त्रयात्मक मानना अर्थात् तीन राशियों द्वारा चरण करने का सिद्धान्त जैसे जीव, अजीव , जीवाजीव, लोक , अलोक लोकालोक आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वात – Vaata.: Air,Wind,Breeze . वायु “औदारिक शरीर में रहने वाली 7 उपधातु में एक धातु “
एकदशांगधारी Acharyas possessing knowledge of 11 Angas (scriptural knowledge). 11 अंगधारी 5 आचार्य- नक्षत्र, यशःपाल, पाण्डु, ध्रुवसेन और कंस।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिवेदसिद्ध Beings salvated from all genders (in accordance with Bhavved). भाववेद की अपेक्षा जो तीनों वेदों से सिद्ध होते हैं त्रिवेदसिद्ध कहलाते है । द्रव्य से पुरूष वेदी, भाव से स्त्री वेदी एंव नपुंसक वेदी भी सिद्ध पद को प्राप्त कर सकते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचा वसति संस्तर विवेक – Vaachaa Vasati Sanstara Vivek.: Discrimination related to hermitage or place (abandonment of hermitage & resting means) विवेक का एक भेद, मैं इस वसति व संस्तर का त्याग करता हूं , ऐसे वचन बोलना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचस्तूपसंघ – Panchstoopasangha. Name of the group of Acharya Veersen. प्रसिद्धधवलाकार आचार्य श्री वीरसेन (ई. 770-827) स्वामी का संघ “