भक्तामर कथा!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर कथा – Bhaktamara Katha. Name of tales written by Pandit Raymallaji and Jaichand Chhabda. पं. रायमल्ल (ई. १६१०) एंव पं. जयचन्द छाबड़ा (ई. १८१३) द्वारा रचित कथा “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर कथा – Bhaktamara Katha. Name of tales written by Pandit Raymallaji and Jaichand Chhabda. पं. रायमल्ल (ई. १६१०) एंव पं. जयचन्द छाबड़ा (ई. १८१३) द्वारा रचित कथा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचनप्राण – Vachanprana.: Power of speech. जीव के 10 प्राणों में से एक प्राण; जीव की वचन व्यापर में कारणभूत योग्यता या शक्ति “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == वक्रता : == सो सद्दो तं धवलत्तणं च रयणायरम्मि उप्पत्ती। संखस्स हिययकुडिलत्तणेण सव्वं पि पब्भट्ठं।। —गाहारयणकोष : ११३ वही शब्द (ध्वनि), वही शुभ्र ताप और रत्नाकर में उत्पत्ति। यह सब कुछ होते हुए भी शंख अपने हृदय की वक्रता के कारण सर्वत्र भ्रष्ट होता है। व्यक्ति घर, धन,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Supreme soul. संसारी जीवो मे से जो उत्कृष्ट आत्मा बन जाती है उसे परात्मा कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्रदु भाषण–Mradu Bhashan. Soft and sweet speech. मधुर एवं विनम्र वचन या उपदेश, भाषा समिति; प्रिय, मधुर या हितकारी वचनों का प्रयोग करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्षार – Vakshaara: Particular 16 mountains in Videh Kshetra (region). विदेह के 32 क्षेत्रों को विभाजित करने वाले अनादिनिधन 16 पर्वत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्क्रांति क्रिया –Nishkraanti Kriyaa. An auspicious and sacred act (related to initiation). गर्भान्वय की 53 क्रियाओं में एक क्रिया; दीक्षा कल्याणक की क्रियाएं, वैराग्य पूर्वक राज्य को त्यागना इत्यादि क्रियाओं के साथ दिगम्बर व्रत को धारण कर केशलोच आदि करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मपुरा (तीर्थ) : Name of Digambar Jain Atishay Kshetra (a place of pilgrimage) near jaipur (raj). The miraculous idol of Lord Pamaprabhau is installed here. राजस्थान में जयपुर के नजदीक स्थित एक दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र । जहाॅं भगवान पदमप्रभु की चमत्कारिक प्रतिमा विराजमान है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनसिज- Manasija. Kamdev – those having the most lustrous & attractive body. कामदेव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वंदना मुद्रा –Vandanaa Mudraa : Standing posture of paying reverence by raised & folded hands with joined palms. मुद्रा के 4 भेदों में एक भेद ;खड़े होकर दोनों कुहनियों को पेट के ऊपर रखना और दोनों हाथों को मुकुलित कमल के आकार में बनाना “