चतुर्दिक मुखदर्शन!
चतुर्दिक मुखदर्शन Four sided face-a supernatural bliss of Lord Arihant. अर्हंत भगवान का केवलज्ञान का एक अतिशय ; सबकी ओर मुख करके स्थित होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दिक मुखदर्शन Four sided face-a supernatural bliss of Lord Arihant. अर्हंत भगवान का केवलज्ञान का एक अतिशय ; सबकी ओर मुख करके स्थित होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यक्तव उद्योतन – Samyaktva Udyotana. Right enlightenment. सम्यक्तवाराधना। शंकादि दोषो से रहित निर्दोष सम्यग्दर्षन की प्राप्ति होना।
चिरकाल स्थायी Steady for infinite time. अनंतकाल तक स्थाई रहने वाली जैसे , स्वभाव द्रव्य व्यंजन पर्याय ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मान – Sammaana. Respect, reverence, honour. आदर, विनय। व्रतादि से यंुक्त साधु, आर्यिका एवं बड़े जनेा का यथायोग्य विनय-सम्मान करना।
उद्दावण Causing turmoil to living beings. जीवों को सताना मारना आदि उपद्रव उद्दावण (उत्तापन) कहलाते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्तेयानंद – Steyanamda. To feel pleasure in theft.रौद्रध्यान के 4 भेदो मे एक भेद, चैर्यानंद। प्रमादपूर्वक दूसरे के धन को बलात् हरने का अभिप्राय रखना या उसमे हर्षित होना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लालसा – प्रबल इच्छा अभिलाशा, निदान षल्य भोगो की लालसा रखना। Lalasa-Keen, Desire Longing
चित्रगुप्त Name of the 17th predestined Tirthankar (Jaina-Lord). भावी सत्रहवें तीर्थंकर का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]