ज्ञानामृत सुदं में आउस्संतो ‘‘पढमं ताव सुदं में आउस्संतो।’’ हे आयुष्मन्तों भव्यों ! मैंने प्रथम ही सुना है। क्या सुना है ? ‘‘ गिहत्थधम्मं’’ गृहस्थ धर्म सुना है। किनसे सुना है ? ‘‘ भयवदा महदिमहावीरेण’’ भगवान् महति महावीर के श्रीमुख से सुना है। वे भगवान् महावीर वैâसे हैं ? ‘‘समणेण महाकस्सवेण सवण्हाणेण सव्वलोयदरसिण।’’ जो श्रमण…
अकृत्रिम जिनमंदिर के बावड़ी में जिनमंदिर चउजोयणउच्छेहा उवरिं पीढस्स कणयवरखंभा। विविहमणिणियरखचिदा चामरघंटापयारजुदा।।१९१२।। सव्वेसुं थंभेसुुं महाधया विविहवण्णरमणिज्जा। णामेण महिंदधया छत्तत्तयसिहरसोहिल्ला।।१९१३।। पुरदो महाधयाणं मकरप्पमुहेहिं मुक्कसलिलाओ। चत्तारो वावीओ कमलुप्पलकुमुदछण्णाओ।।१९१४।। पण्णासकोसउदया कमसो पणुवीस रुंददीहत्ता। दस कोसा अवगाढा वावीओ वेदियादिजुत्ताओ।।१९१५।। को ५० । १०० । गा १० । वावीणं बहुमज्झे चेट्ठदि एक्को जिणिंदपासादो। विप्पुरिदरयणकिरणो किंबहुसो सो णिरुवमाणो।।१९१६।। तत्तो दहाउ पुरदो…
द्वारिकापुरी द्वारिका नगरी की रचना— इधर जमाई और भाई आदि के वध से जरासंध ने समस्त यादवों को नष्ट करने का मन में पक्का विचार कर लिया था तब उसने अपरिमित सेना को साथ लेकर यादवों की ओर प्रयाण कर दिया। उस समय गुप्तचरों द्वारा यादवों को इस बात का पता चल गया। राजा समुद्रविजय…
नियमसार : अनुपम बोधामृत प्रातः स्मरणीय आ० कुन्दकुन्द देव की 187 गाथाओं में रचित यह अनुपम कृति है। बारह अधिकारों में, जीव, अजीव, शुद्धभाव, व्यवहार चारित्र, परमार्थ प्रतिक्रमण, निष्चय परमावष्यक, शाद्धोपयोग आदि में अपने विशय का निरवषेश वर्णन करने वाला यह बोधामृत है। प्रस्तुत शाध प्रबन्ध की केन्द्र बिन्दु स्याद्वाद चन्द्रिका टीका में आर्यिका ज्ञानमती…
तीर्थंकर अरहनाथ इस जम्बूद्वीप में सीता नदी के उत्तर तट पर एक कच्छ नाम का देश है। उसके क्षेमपुर नगर में धनपति राजा राज्य करता था। किसी दिन उसने अर्हन्नन्दन तीर्थंकर की दिव्यध्वनि से धर्मामृत का पान किया, जिससे विरक्त होकर शीघ्र ही जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर ली। ग्यारहअंगरूपी महासागर का पारगामी होकर सोलह कारण…