सूखे ठूंठ मे कोंपल
सूखे ठूंठ मे कोंपल (काव्य आठ से सम्बन्धित कथा) ‘‘आँख के अन्धे और नाम नयनसुख।’’ ‘‘जन्म के कंगाल पर नाम धनपाल!’’ आखिर नाम से कुछ बनता बिगड़ता तो है नहीं, फिर भी दैव के प्रति मानो वह एक चुनौती अवश्य होता है! अथवा होता है एक तीखा व्यंग! और इस प्रकार वह नाम ही कभी-कभी…