अन्तराधिकार विवरण स्याद्वाद चन्द्रिका के लिखते समय पू० माता जी का यह दृश्टिकोण रहा है कि आ० कुन्दकुन्द के नियमसार के मन्तव्यों को सुगठित, सुस्पश्ट रूप में पाठकों को अवगत कराया जावे। आ० कुन्दकुन्द की प्रौढ़ लेखन शैली से अभ्यासी जन परिचित ही हैं। उनके कथन को जो कि सर्वत्र प्रवाहपूर्ण एवं तारतम्य को लिए…
ग्रीष्म ऋतु में संतुलित आहार लें ग्रीष्म ऋतु में शरीर को स्वस्थ एवं तंदुरूस्त रखने के लिए संतुलित आहार ही सर्वोत्तम स्रोत है। यूं तो हर ऋतु में ही स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए लेकिन ग्रीष्म ऋतु की तपन और चिलचिलाती धूप से बचने के लिए खान—पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।…
आगम को जाने और माने अवहेलना ना करें (प. पू. राष्ट्रसंत, युग प्रमुख, श्रमणाचार्य , गणाचार्य श्री १०८ विरागसागर जी महाराज) संघ विशेष के कतिपय साधक आम जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं कि आर्यिका आदि सवस्त्रधारियों की विनय, वंदना, पूजा नहीं करना चाहिए, आगम में प्रमाण नहीं है। जो करता है सो मिथ्यादृष्टि है,…
अमरूद का प्राकृतिक रूप में सेवन, बहुत से रोगों से दिलाता है छुटकारा अमरूद बाहर से कैसा भी हो, अन्दर से सफेद अमरूद अधिक स्वादिष्ट होता है । गुलाबी अमरूद की भी कुछ किस्में काफी मीठी व मधुर होती है । इलाहाबादी अमरूद सबसे उत्तम किस्म का माना जाता है । यू.पी. के अमरूद…
धर्मध्यान श्री गौतमस्वामी ने प्रतिक्रमण पाठ में धर्मध्यान के दश भेद कहे हैं— ‘दसण्णं धम्मज्झाणाणं। दससु धम्मज्झाणेसु। दससु धम्मज्झाणेसु दसविह धम्मज्झाणाणं। मुनिचर्या पृ. २४, १३५, १७०, २३१।टीकाकार श्री प्रभाचन्द्राचार्य ने उनके नाम व लक्षण दिये हैं— अपायविचय उपायविचय विपाकविचय विरागविचय लोकविचय भवविचय जीवविचय आज्ञाविचय संस्थानविचय संसारविचय ये १० धर्मध्यान है। चारित्रसार में भी धर्मध्यान के…