कथा और कथक के लक्षण कथा और कथक के लक्षण छंद बुद्धिमानों को इस कथारम्भ के पहले ही कथा, वक्ता और श्रोताओं के लक्षण अवश्य ही कहना चाहिए। मोक्ष पुरुषार्थ के उपयोगी होने से धर्म, अर्थ तथा काम का कथन करना कथा कहलाती है। जिसमें धर्म का विशेष निरूपण होता है उसे बुद्धिमान् पुरुष सत्कथा…
राजसभा में मंत्री गणों द्वारा नगरी की शोभा का वर्णन एवं राजा पुहुपाल की रानी निपुणसुन्दरी के साथ चर्चा राजा पुहुपाल अपने राजसिंहासन पर आरूढ़ थे। मंत्रीगण नगरी की शोभा का बखान कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा— ‘राजन्! इस उज्जयिनी नगरी में राजपथ के दोनों ओर गगनचुम्बी राजप्रासादों की कतार बनी हुई है। उनके…
दारानगर—शहजादपुर का जैन पुरातत्व इलाहाबाद से ६० किमी. उत्तर—पश्चिम कौशाम्बी जनपद में गंगा नदी के दायें तट पर स्थित कड़ा मध्यकाल में राजनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण नगर था। दिल्ली सल्तनत के प्रथम बादशाह कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे तेरहवीं सदी के प्रारम्भ में कड़ा—मानिकपुर सूबे का केन्द्र बनाया था। मुगल बादशाह अकबर ने जब साम्राज्य…
घरेलू उपचार चेहरे पर झाँइं १. यह व्याधि पित्त की विकृति के कारण होती है। दो छुहारे मसलकर गाय के दूध में डालकर पकाकर सोते समय रोज सेवन करें। एक नींबू का रस , बदाम रोगन, ग्लिसरीन तीनों बराबर मात्रा में लेकर शीशी में भर लें। प्रात: सांय अच्छी तरह हिला कर चेहरे पर लगायें।…
दशरथ के पिता राजा अनरण्य ने अपने छोटे पुत्र अनन्तरथ के साथ दीक्षा ली थी दूतात्तत्प्रेषिताज् ज्ञात्वा तद्वृत्तान्तमशेषतः। मासजाते श्रियं न्यस्य नार्यौ दशरथे भृतम्।।१६६।। सकाशेऽभयसेनस्य निग्र्रन्थस्य महात्मनः। राजानन्तरथेनामा प्रवव्राजातिनिः स्पृहः।।१६७।। अनरण्योऽगमन्मोक्षमनन्तस्यन्दनो महीम्। सर्वसङ्गविनिर्मुक्तो विजहार यथोचितम्।।१६८।। अत्यन्तदुस्सहैर्योगी द्वािंवशतिपरीषहै:। न क्षोभितस्ततोऽनन्तवीर्याख्यां स क्षितौ गतः।।१६९।। वपुर्दशरथो लेभे नवयौवनभूषितम्। शैलकूटमिवोत्तुङ्गं नानाकुसुमभूषितम्।।१७०।। दीक्षा धारण करने के पहले उसने राजा अनरण्य…
जैनत्व के प्रतीक तीन कार्य (जिनेन्द्र देव दर्शन, जलगालन और रात्रि भोजन त्याग) डा. सुरेन्द्रकुमार जैन ‘भारती’ मनुष्य के रूप में जन्म लेने वाले व्यक्ति को यदि जैन कुल मिल जाये तो यह इस दृष्टि से महत संयोग है कि यदि वह जैन संस्कारों का पालन करेगा तो वह अपने मनुष्य जीवन को पतन से…
ध्यान कैसे करें ? घर के किसी एकान्तस्थान या पार्क आदि खुले स्थान में बैठकर मन को एकाग्रचित्त करें और सर्वप्रथम एक गीत के द्वारा अध्यात्मरस में निमग्न होने का पुरुषार्थ करें- ध्यान की साधना से मन, वचन, काय तीनों पवित्र एवं स्वस्थ होते हैं। पद्मासन मुद्रा ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है, वह…
पं. तेजपाल कृत अपभ्रंश पाण्डुलिपि वरांग-चरिउ की प्राप्त प्रतियों का परिचय सारांश उत्तर भारतीय जैन ग्रंथ भंडारों में प्राकृत, संस्कृत के अतिरिक्त अपभ्रंश भाषा की पांडुलिपियाँ प्रचुरता से प्राप्त होती है। प्रस्तुत आलेख में १५वीं शताब्दी के रचनाकार पं. तेजपाल कृत वरांगचारिउ की करौली, अजमेर एवं नागौर से प्राप्त ३ पांडुलिपियों का परिचय एवं उनके…
निषधपर्वत का वर्णन सोलससहस्सअडसयबादाला दो कला णिसहरुंदं। उणवीसहिदा सूई तीससहस्साणि छल्लक्खं१।।१७५०।। १६८४२। २। ६३००००। १९१९ कूडो सिद्धो णिसहो हरिवस्सो तह विदेहहरिविजया। सीदोदपरविदेहा रुजगो य हवेदि णिसहउवरिम्मि।।१७५८।। ताणं उदयप्पहुदी सव्वे हिमवंतसेलकूडादो। चउगुणिया णवरि इमे कूडोवरि जिणपुरा सरिसा।।१७५९।। जंणामा ते कूडा तंणामा वेंतरा सुरा तेसुं। बहुपरिवारेिंह जुदा पल्लाऊ दसधणुत्तुंगा।।१७६०।। निषध पर्वत का वर्णन निषध पर्वत का विस्तार…