जैन गणित एवं त्रिलोक विज्ञान पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार International Seminar on Jaina Mathematics & Cosmology जैन साहित्य ज्ञान विज्ञान का अथाह सागर है तथा आधुनिक युग की अनेक वैज्ञानिक उपलब्धियों के मूल सूत्र एवं विचार प्रच्छन्न रूप से प्राकृत साहित्य में निहित है। वनस्पतियों में जीवन अथवा जल में जीवराशि अथवा मापन की तालिकाएँ अथवा…
तेरहद्वीप जिनालय व्रत(मध्यलोक जिनालय व्रत) इस व्रत में ४५८ उपवास या एकाशन करना है। इसमें तिथि का कोई नियम नहीं है। व्रत के दिन तेरहद्वीप के अकृत्रिम जिनमंदिर की पूजा करके प्रथम समुच्चय जाप्य करना, पुन: एक-एक मंत्र की जाप्य करना। ४५८ व्रतों में क्रम से एक-एक जाप्य करना है। यह मंत्र सर्व मनोरथों को…
भगवान महावीर की उपसर्ग विजयभूमि ऐतिहासिक तीर्थ उज्जैन -उमेश जैन, फिरोजाबाद भारतीय भूभाग के वर्तमान में मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर बसी उज्जैन नगरी भरत क्षेत्र के इस आर्यावत्र्त की अतिप्राचीन नगरियों में से एक है। इसके अतीत की प्रमाणिकता पौराणिक ग्रंथों और इतिहास मेें वर्णित कथानकों, घटनाओं से प्रमाणित है। जैन,…
तत्वार्थसूत्र में जीव विज्ञान की अवधारणाओं का निरूपण सारांश जैन दर्शन एवं विज्ञान के प्रतिबिम्ब ‘तत्वार्थसूत्र’ में जीव विज्ञान की मूलभूत एवं आधुनिक अवधारणाओं से अत्यधिक तथा आश्चर्यजनक समानतायें परिलक्षित होती हैं । पारिस्थितिकी, जैव भूगर्भीय चक्र, वर्गीकरण विज्ञान, वनस्पतियों का महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा सूक्ष्म जीवों का महत्व इत्यादि पर इस ग्रन्थ में…
कर्मनिर्जरा व्रत विधि एवं कथा व्रतविधि— आश्विन सुदी ५ के दिन इन व्रतिकों को प्रासुक जल से अभ्यंगस्नान करके नया धौतवस्त्र पहनना चाहिए। सब पूजा-सामग्री हाथ में लेकर चैत्यालय में जाकर मंदिर की तीन प्रदक्षिणा करके ईर्यापथशुद्धि आदि क्रिया करके श्री जिनेन्द्र को भक्ति से साष्टांग नमस्कार करना चाहिए। पुन: भूमि शुद्धि करके उस पर…
अनदेखा— सच ऐसे रेस्टोरेंट्स के बारे में कुछ सच्चाई जहां मांसाहारी एवं शाकाहारी भोजन एक साथ बनाता है। यह मेरे निजी अनुभव के आधार पर लिखा गया है। नितिन सोनी मैंने पिछली एक साल ऐसे रेस्टोरेंट में प्रबंधन का कार्य संभाला , जहां पर शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों तरह का खाना बनता है। अपनी आंखों…
जिनधर्म की महिमा (आचार्य श्री अकलंकदेव की कथा) (भारत देश में मान्यखेट नामक नगर में राजा शुभतुंग और रानी पद्मावती राज्य करते थे। वे धर्मप्रिय राजा थे। एक बार उनकी नगरी में एक मुनि का पदार्पण हुआ। उस समय आष्टान्हिक पर्व चल रहा था अत: राजा—रानी अपने पुत्र अकलंक और निकलंक के साथ उनके…