”चैत्यभक्ति सम्बन्धी प्रश्नोत्तरी ” प्रस्तुति – आर्यिका गरिमामती माताजी प्रश्न-१ – चैत्यभक्ति के रचयिता कौन है ? उत्तर – चैत्य भक्ति के रचयिता श्री गौतम स्वामी गणधर देव है “प्रश्न-२- किसको प्रत्यक्ष करके गौतम स्वामी ने स्तुति की ?उत्तर – महावीर स्वामी को प्रत्यक्ष करके गौतम स्वामी ने स्तुति की “प्रश्न-३- कौनसा धर्म जयवंत हो…
चौंसठ ऋद्धि व्रत विधि चोसठ ऋद्धि मंत्र की अपेक्षा चौंसठ व्रत करना चाहिए। व्रत के दिन उपवास करना उत्तम, अल्पाहार फल, दूध, मेवा या जल आदि लेना मध्यम और एक बार शुद्ध भोजन करना जघन्य विधि है। प्रत्येक माह में अष्टमी, चतुर्दशी आदि किसी भी दिन व्रत कर सकते हैं। व्रत पूर्ण कर ‘चौंसठ ऋद्धि…
जीव के पंच परिवर्तन जीव के दो भेद हैं-संसारी और मुक्त। ‘‘चतुर्गतौ संसरणं संसार:’ चतुर्गति में संसरण करना-परिभ्रमण करना इसका नाम संसार है। ‘संसार एशां सन्ति ते संसारिण:’ यह संसार जिन जीवों के पाया जाता है, वे संसारी कहलाते हैं। संसार के ५ भेद हैं-द्रव्य संसार, क्षेत्र संसार, काल संसार, भव संसार और भाव संसार।…
अत्तिमब्बे डॉ. हंपा नागराजय्य अत्तिमब्बे ने धार्मिक कार्यों में बेशुमार धन बहाया। वह अपने पूर्वजों के रास्ते पर चली तथा उनसे भी श्रेष्ठ कार्य आपने किया। पूर्वजों से भी अधिक मात्रा में जैन धर्म की प्रभावना की आपकी श्रेष्ठता के बारे में रन्न कवि ने अपनी रचना में इस प्रकार लिखा है। पिरियं बूतुगं आतनिं…
मनोवती की दर्शन प्रतिज्ञा (सर्वप्रथम एक नृत्य से कार्यक्रम का शुभारंभ करें) सूत्रधार—सेठ हेमदत्त के घर की सजावट आज राजमहल से कम नहीं है। सेठानी हेमश्री भी अत्यधिक प्रसन्न हैं क्योंकि उनके सातवें और सबसे छोटे लाडले पुत्र की शादी होकर अत्यन्त रूपवती और गुणवान बहू से उनका आँगन महक उठा है। बल्लभपुर शहर के…
शुक्रवार व्रत कथा की महिमा मगध देश में राजगृह नगर के पास विपुलाचल पर्वत पर भगवान महावीर का समवसरण आया है। उस मगध देश में महाराजा श्रेणिक रानी चेलना के साथ राज्य करते थे, यह समाचार जब वनमाली को ज्ञात हुआ तो वह प्रसन्न होकर महाराज को समाचार देने के लिए गया— (१) वनमाली—महाराज की…
जैन दर्शन मंगलाचरण णमोकार महामंत्र एसो पंच णमोयारो, सव्व पावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेिंस, पढमं हवइ मंगलं।। जिसके द्वारा वस्तु तत्त्व का निर्णय किया जाता है वह दर्शनशास्त्र है। कहा भी है-‘‘दृश्यते निर्णीयते वस्तुतत्त्वमनेनेति दर्शनम्।’’ इस लक्षण से दर्शनशास्त्र तर्वâ-वितर्वâ, मन्थन या परीक्षास्वरूप हैं जो कि तत्त्वों का निर्णय कराने वाले हैं। जैसे-यह संसार नित्य है…
जैन संस्कृति एवं पर्यावरण-संरक्षण पर्यावरण वैज्ञानिकों की मान्यतानुसार इस विराट सौरमण्डल में पृथ्वी ग्रह पर ऐसी अद्भुत जीवन संरचना है कि यहाँ अगाध सागर, उत्तुंग पर्वत, जीवन रस बहाती नदियाँ और वायुमण्डल की छत्रछाया है। नदियों के जल का सिंचन पाकर इस ऊर्वरा भूमि पर हरे—भरे पेड—पौधे उत्पन्न हुए हैं। पेड़—पौधों ने अपनी प्राण—वायु से…